अब इस नई ट्रेन से वैशाली भाया तिलैया राजगीर कोडरमा तक यात्रा आसान
राजगीर (नालंदा दर्पण)। बौद्ध धर्म के अनुयायियों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों एवं आम लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। रेलवे ने कोडरमा से गया, तिलैया, राजगीर होते हुए वैशाली तक बौद्ध सर्किट को जोड़ने वाली नई फास्ट पैसेंजर ट्रेन शुरू करने की घोषणा की है।
यह ट्रेन बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों वैशाली, राजगीर, बोधगया और गया को रेल मार्ग से और बेहतर तरीके से जोड़ेगी, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय यात्रियों को आवागमन में काफी सहूलियत होगी।
इस नई ट्रेन को वैशाली-कोडरमा स्पेशल ट्रेन (गाड़ी संख्या 63383) और कोडरमा-वैशाली स्पेशल ट्रेन (गाड़ी संख्या 63384) के नाम से जाना जाएगा। इसका परिचालन जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसका नियमित परिचालन और ट्रेन नंबर की अंतिम तिथि शीघ्र निर्धारित की जाएगी।
गाड़ी संख्या 63383: यह ट्रेन सुबह 05:15 बजे वैशाली स्टेशन से प्रस्थान करेगी और दोपहर 03:15 बजे कोडरमा जंक्शन पहुंचेगी।
मार्ग: वैशाली, हाजीपुर, सोनपुर, पहलेजा घाट, पाटलिपुत्र, पटना, राजेंद्र नगर, फतुहा, बख्तियारपुर, बिहार शरीफ, नालंदा, राजगीर, तिलैया, गया, गुरपा, पहाड़पुर, मानपुर, और अंत में कोडरमा जंक्शन।
गाड़ी संख्या 63384: यह ट्रेन शाम 04:45 बजे कोडरमा जंक्शन से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 02:45 बजे वैशाली पहुंचेगी।
मार्ग: कोडरमा जंक्शन से पहाड़पुर, मानपुर, गया, तिलैया, राजगीर, बिहार शरीफ, बख्तियारपुर, फतुहा, राजेंद्र नगर, पटना, पाटलिपुत्र, पहलेजा घाट, सोनपुर, हाजीपुर और वैशाली।
बौद्ध सर्किट भारत के उन प्रमुख स्थानों को जोड़ता है, जो भगवान बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं से जुड़े हैं। वैशाली में भगवान बुद्ध ने कई उपदेश दिए। राजगीर में प्रथम बौद्ध संगीति हुई। बोधगया में बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई। जोकि अब नई मेमू ट्रेन के माध्यम से और सुगमता से जुड़ जाएंगे। इसके अलावा बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल फतेहपुर का गुरुपद गिरि भी इस सर्किट का हिस्सा है।
यह नई ट्रेन न केवल बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए, बल्कि स्थानीय यात्रियों के लिए भी एक वरदान साबित होगी। यह ट्रेन बिहार और झारखंड के बीच आवागमन को और सुगम बनाएगी। इससे व्यापार, शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। खास तौर पर यह ट्रेन उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो इन पवित्र स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन सीमित परिवहन सुविधाओं के कारण असुविधा का सामना करते थे।
रेलवे ने इस ट्रेन के परिचालन के लिए समय-सारणी और मार्ग को ध्यानपूर्वक तैयार किया है। ताकि यात्रियों को अधिकतम सुविधा मिले। इस ट्रेन के शुरू होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बिहार और झारखंड के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान भी मजबूत होगा।





