घने कोहरे की चादर में लिपटे उषा भास्कर को अर्घ्य, छठ महापर्व का भव्य समापन

बेन (नालंदा दर्पण)। लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा नालंदा जिले में अनोखे अंदाज में संपन्न हुआ। चौथे और अंतिम दिन 28 अक्टूबर को उदयीमान सूर्य भगवान भास्कर को अर्घ्य देने का अवसर आया, लेकिन प्रकृति ने इस बार एक रहस्यमयी चुनौती पेश की। घने कोहरे की मोटी चादर ने पूरे क्षेत्र को ढक लिया, जिससे छठ घाटों पर दृश्यता मात्र 20 फीट तक सीमित हो गई।

कई वर्षों बाद देखी गई इस कोहरे की स्थिति ने व्रतियों की श्रद्धा को और गहरा कर दिया। फिर भी हजारों छठव्रतियों ने अटूट विश्वास के साथ उषा अर्घ्य अर्पित किया और महापर्व का समापन किया। इस अवसर पर परिवार की सुख-समृद्धि की कामनाएं की गईं, जबकि प्रशासन की मुस्तैदी ने पूरे आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाए रखा।

सुबह के समय बेन प्रखंड क्षेत्र सहित समूचे नालंदा जिले में कोहरा इतना घना था कि सूर्य देव की पहली किरणें भी धुंधली नजर आ रही थीं। छठ घाटों पर पहुंचे व्रती मुश्किल से एक-दूसरे को पहचान पा रहे थे। कोहरे ने घाटों को अपने आगोश में ले लिया, जिससे वातावरण रहस्यमयी और दिव्य हो गया।

कई श्रद्धालुओं ने बताया कि यह दृश्य उन्हें बचपन की यादें ताजा कर रहा था, जब वर्षों पहले इसी तरह की कोहरे की स्थिति में छठ मनाया जाता था। एक व्रती ने कहा कि कोहरा कितना भी घना हो, हमारी आस्था इससे मजबूत है। भगवान भास्कर तो हमारे मन में विराजमान हैं।

इसी बीच बड़ी संख्या में लोग घाटों पर एकत्र हुए। महिलाएं सूप में ठेकुआ, फल और अन्य प्रसाद लेकर खड़ी थीं, जबकि पुरुष परिवार के साथ सहयोग कर रहे थे। कोहरे के बावजूद अर्घ्य का समय निर्धारित था और सभी ने समय पर सूर्य को जल अर्पित किया। बादलों और कोहरे की परत के पीछे से उगते सूर्य की किरणें जब झलक मिलीं तो घाटों पर जयकारे गूंज उठे।

नालंदा के विभिन्न छठ घाटों पर सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई। कोहरे के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी थी, लेकिन भारी संख्या में श्रद्धालुगण घाट पहुंचे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ने इस पर्व की रौनक में भाग लिया। अर्घ्य के बाद व्रतियों ने 36 घंटे से अधिक का कठिन उपवास तोड़ा। दूध, चावल और गुड़ से बने खीर का प्रसाद ग्रहण किया गया, जो परिवार और पड़ोसियों में बांटा गया।

इस पर्व की विशेषता रही कि कोहरे ने इसे और यादगार बना दिया। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं, जहां कोहरे में डूबे घाट और सूर्य की धुंधली आकृति दिखाई दे रही थी। यह दृश्य न केवल धार्मिक था, बल्कि फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना।

छठ पर्व को सुचारु रूप से संपन्न कराने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका प्रशंसनीय रही। बेन प्रखंड सहित पूरे जिले में घाटों पर बैरिकेडिंग, लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था की गई। कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से दुर्घटना की आशंका थी, लेकिन पुलिस बल ने चौकसी बरती। मेडिकल टीम और एम्बुलेंस तैनात रही। प्रखंड विकास पदाधिकारी और पुलिस अधिकारी स्वयं घाटों पर मौजूद रहे, जिससे किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं हुई।

जिला प्रशासन ने पहले से ही छठ घाटों की सफाई और जल स्तर की जांच कराई थी। कोहरे की पूर्व सूचना पर अतिरिक्त फॉग लाइट्स लगाई गईं। व्रतियों ने प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी मुस्तैदी से पर्व शांतिपूर्ण रहा।

बता दें कि छठ पूजा बिहार और विशेषकर नालंदा की सांस्कृतिक धरोहर है। इस पर्व में सूर्य देव की उपासना संतान, परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए की जाती है। इस बार कोहरे ने इसे और चुनौतीपूर्ण बना दिया, लेकिन व्रतियों की दृढ़ता ने साबित किया कि आस्था हर बाधाओं से परे है। पर्व के समापन के साथ ही क्षेत्र में उत्सव का माहौल है, और लोग अगले वर्ष की तैयारी में जुटने लगे हैं।

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