बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नगर परिषद क्षेत्र में मकान निर्माण को लेकर सख्त नियम-कानून (Provision) बनाए गए हैं, जिनका पालन करना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति किसी नगर परिषद या नगर पंचायत क्षेत्र में अपने सपनों का आशियाना बनाना चाहता है तो उसे सबसे पहले नगर परिषद में निर्माण संबंधी नक्शा प्रस्तुत करना होता है और उसे पास कराना जरूरी है। यह प्रक्रिया न केवल निर्माण की वैधता सुनिश्चित करती है, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास और सुरक्षा को भी बढ़ावा देती है। लेकिन क्या है यह प्रक्रिया और इसके पीछे के नियम? आइए, विस्तार से जानते हैं।
नगर परिषद के नियमों के अनुसार मकान निर्माण शुरू करने से पहले जमीन मालिक को अपने प्रस्तावित भवन का नक्शा नगर परिषद कार्यालय में जमा करना होता है। इसके बाद कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) इस नक्शे को जांच के लिए नगर परिषद के जिम्मेदार कर्मियों को सौंपते हैं। ये कर्मचारी संबंधित जमीन का मौके पर निरीक्षण करते हैं और जमीन से जुड़े सभी कागजातों की पड़ताल करते हैं।
इसमें जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज की रसीद और अन्य प्रामाणिक दस्तावेज शामिल होते हैं। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रस्तावित निर्माण नियमों के अनुरूप है या नहीं। संतुष्ट होने के बाद कर्मचारी अपना निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार करते हैं और इसे नक्शा पास करने के लिए कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपते हैं।
नगर परिषद के नियमों में यह भी स्पष्ट है कि मकान निर्माण के दौरान आसपास की जमीन का कुछ हिस्सा खाली छोड़ना अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, अगर जमीन की चौड़ाई 33 फीट से अधिक है तो मकान के दोनों ओर कम से कम तीन फीट या इससे अधिक जमीन (नियमों के अनुसार) खाली छोड़नी होगी।
इसके अलावा यदि मकान की ऊंचाई 11 मीटर से अधिक है तो पार्किंग के लिए भी पर्याप्त जगह सुनिश्चित करनी होगी। आवागमन की सुविधा के लिए सड़क की चौड़ाई को ध्यान में रखते हुए नक्शा तैयार किया जाता है। ताकि भविष्य में न तो मकान मालिक को परेशानी हो और न ही आसपास के लोगों को। इन सभी मानकों का पालन होने पर ही नगर परिषद नक्शे को स्वीकृति देती है।
क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया? नक्शा पास कराने की यह प्रक्रिया इसलिए अनिवार्य की गई है ताकि शहर में अनियोजित निर्माण पर रोक लग सके। बिना नक्शा पास कराए बनाए गए मकान न केवल सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं, बल्कि सड़क, पार्किंग और अन्य सुविधाओं के लिए भी समस्या खड़ी कर सकते हैं।
नियमों का पालन करने से भूकंप, आगजनी जैसी आपात स्थितियों में नुकसान की आशंका कम होती है और शहर का सौंदर्य भी बना रहता है। इसके अलावा नक्शा पास होने के बाद ही मकान का होल्डिंग टैक्स निर्धारित होता है। जिससे नगर परिषद को राजस्व प्राप्त होता है।
नक्शा पास होने के बाद ही मकान मालिक को निर्माण शुरू करने की अनुमति मिलती है। यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण कार्य वैधानिक रूप से सही हो और भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी अड़चन न आए। बिहारशरीफ जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में इन नियमों का पालन और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि अनियोजित निर्माण से ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि कई लोग इस प्रक्रिया से अनजान होते हैं या इसे नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नगर परिषद को चाहिए कि वह लोगों के बीच जागरूकता फैलाए और नियमों का कड़ाई से पालन करवाए। साथ ही नक्शा पास करने की प्रक्रिया को और पारदर्शी व सरल बनाया जाए। ताकि आम नागरिक बिना किसी परेशानी के इसका लाभ उठा सकें।
नगर परिषद क्षेत्र में मकान बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि नक्शा पास कराना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके अपने हित और शहर के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। क्या आप भी अपने निर्माण की योजना बना रहे हैं? अगर हां तो पहले नियमों को समझें और सही प्रक्रिया का पालन करें।
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