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इस्लामपुर सुभाष हाई स्कूल का खेल मैदान बदहाली पर उठ रहे सवाल

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर नगर परिषद क्षेत्र के सुभाष हाई स्कूल का खेल मैदान अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। कभी इस मैदान की रौनक और हलचल इस क्षेत्र की शान हुआ करती थी, लेकिन आज यह उपेक्षा का शिकार होकर खस्ताहाल हो चुका है। मैदान के कुछ हिस्सों में जलजमाव की समस्या है तो शेष हिस्सों में सुबह के समय लोग कसरत और बच्चे खेलकूद में व्यस्त रहते हैं। लेकिन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते इस मैदान की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।Questions are being raised about the poor condition of the playground of Islampur Subhash High School 1

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मैदान पहले न केवल खेलकूद का केंद्र था, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी प्रमुख स्थल हुआ करता था। खासकर दुर्गा पूजा के अवसर पर यहाँ रावण दहन का भव्य आयोजन होता था, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और दर्शक जुटते थे। उस समय मैदान की स्थिति बेहतर थी और इसकी देखरेख पर ध्यान दिया जाता था। लेकिन रावण दहन जैसे आयोजनों के बंद होने के बाद से इस मैदान की ओर किसी का ध्यान नहीं गया और यह धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार हो गया।

मैदान में जगह-जगह गड्ढे और जलजमाव ने इसे खेल के लिए असुरक्षित बना दिया है। सुबह व्यायाम करने वाले बुजुर्गों और खेलकूद में रुचि रखने वाले बच्चों को अब इस मैदान का उपयोग करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

समाजसेवी अरविंद विश्वकर्मा और राजेश खन्ना ने इस मैदान की दयनीय स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने राज्य सरकार से इस मैदान के जीर्णोद्धार और सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

अरविंद विश्वकर्मा ने कहा कि यह मैदान न केवल बच्चों के लिए खेल का स्थान है, बल्कि सुबह व्यायाम करने वाले बुजुर्गों और युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर इसे ठीक कर दिया जाए, तो यह फिर से समुदाय का गौरव बन सकता है।

वहीं राजेश खन्ना ने भी सरकार से मांग की कि मैदान की मरम्मत के साथ-साथ यहाँ नियमित रखरखाव की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।Questions are being raised about the poor condition of the playground of Islampur Subhash High School.

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस मैदान को न केवल खेल के लिए, बल्कि सामुदायिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी पुनर्जनन किया जा सकता है। इसके लिए उचित जलनिकासी व्यवस्था, समतल जमीन और नियमित रखरखाव की जरूरत है। यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में कदम उठाए तो यह मैदान फिर से इस्लामपुर की शान बन सकता है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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