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राजगीर विधानसभा चुनाव-2025: सियासी कयासों के बीच प्रत्याशियों पर बहस

राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजगीर विधानसभा सीट पर 10 नवंबर 2025 को होने वाले मतदान ने नालंदा जिले की राजनीति को गरमा दिया है। चुनाव आयोग की घोषणा के बाद से यहां सियासी हलचल तेज हो गई है, जहां टिकट वितरण को लेकर कयासों का दौर चल रहा है।

अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन संभावित चेहरों की दौड़ और पार्टियों के बीच जुगाड़बाजी की खबरें जोरों पर हैं। वर्तमान विधायक कौशल किशोर (जदयू) अपनी सीट बचाने की कोशिश में लगे हैं, जबकि विपक्षी दल भी नए-पुराने चेहरों पर दांव लगाने की रणनीति बना रहे हैं। आइए, इस चुनाव की प्रमुख बातों पर नजर डालें।

मतदान की तारीख:  राजगीर विधानसभा 10 नवंबर 2025 (दूसरे चरण में शामिल है। बिहार चुनाव दो चरणों 6 और 11 नवंबर को हो रहे हैं।

परिणाम घोषणा: यहां ुपिणाम की घोषणा 14 नवंबर 2025 को होगी।

प्रशासनिक तैयारी: जिला प्रशासन ने मतदान केंद्रों की व्यवस्था तेज कर दी है। कुल 90,000 से अधिक मतदान केंद्र पूरे बिहार में बनाए जा रहे हैं, जिसमें राजगीर के लिए भी विशेष फोकस है।

सियासी माहौल: आने वाले एक महीने में प्रचार, आरोप-प्रत्यारोप और नामांकन का दौर चलेगा। पर्व-त्योहारों के बीच यह चुनावी मेला काफी रोचक रहने की उम्मीद है।

राजगीर विधानसभा (एससी आरक्षित) में कुल 2,98,562 मतदाता हैं, जो प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। यहां लिंग अनुपात प्रति हजार पुरुषों पर 902 महिलाएं है। मतदाता सूची में हालिया बदलावों ने युवा भागीदारी बढ़ाई है।

श्रेणी संख्या
कुल मतदाता 2,98,562
पुरुष 1,56,961
महिला 1,41,596
थर्ड जेंडर 5
18-19 वर्ष के नए मतदाता 4,293
80 वर्ष से अधिक वृद्ध लगभग 6,300

ये आंकड़े 2025 की विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद के हैं, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना था। 2020 में यहां मतदान प्रतिशत 53.76% था, जबकि 2015 में 54.13%। इस बार युवा वोटरों की सक्रियता से मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

राजगीर नालंदा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां जदयू-भाजपा गठबंधन (एनडीए) का दबदबा रहा है। 2020 में जदयू के कौशल किशोर ने कांग्रेस के रवि ज्योति कुमार को 16,048 वोटों से हराया था। लेकिन 2025 में नई पार्टियां और अप्रत्याशित चेहरों की एंट्री से समीकरण बदल सकते हैं।

जदयू (सत्ताधारी): वर्तमान विधायक कौशल किशोर को दोबारा टिकट मिलने की संभावना प्रबल है। वे पटना और दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के बीच पैरवी में जुटे हैं। हालांकि, पार्टी कैडर को एकजुट रखना उनके लिए चुनौती है, क्योंकि कुछ हार्डकोर नेता नाराज हो सकते हैं। टिकट अन्य किसी को भी मिल सकती है।

आरजेडी-महागठबंधन (विपक्ष): नए चेहरों पर दांव लगाने की चर्चा है। तेजस्वी यादव के हालिया कार्यकर्ता जनसंवाद में राजगीर के नेता सक्रिय दिखे। कुछ पूर्व प्रत्याशी जदयू में सेंध लगाने की कोशिश में हैं।

भाजपा: एनडीए में सीट बंटवारे के बाद दावा मजबूत है। सवर्ण-दलित समीकरण को ध्यान में रखते हुए अप्रत्याशित चेहरा उतार सकते हैं।

जन सुराज (प्रशांत किशोर): पहली बार सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी। 9 अक्टूबर 2025 को उम्मीदवार सूची जारी हो चुकी है। राजगीर में स्थानीय जनाधार बनाने की कोशिश जारी है।

लोजपा (रामविलास)-चिराग पासवान: नालंदा में बहुजन भीम संकल्प सम्मेलन आयोजित कर विपक्ष पर निशाना साधा है। चिराग की एंट्री से कुछ नेता नर्वस हैं, लेकिन दलित वोट बैंक पर उनका फोकस बना हुआ है।

एआईएमआईएम (ओवैसी): मुख्य रूप से सीमांचल पर फोकस है, लेकिन राजगीर जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम वोटों के लिए कोशिश है। 2020 में बिहार में 5 सीटें जीती थीं और अब विस्तार की योजना है।

राजगीर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व (पावापुरी, ग्रिद्धकूट) इसे विशेष बनाता है, लेकिन बेरोजगारी, प्रवासन और बुनियादी सुविधाओं की कमी प्रमुख मुद्दे हैं। एससी आरक्षित सीट होने के कारण दलित वोट निर्णायक हैं। एनडीए को इसका फायदा मिल सकता है, लेकिन विपक्ष नए गठजोड़ के जरिए सेंधमारी कर सकता है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2026 के लोकसभा चुनाव से पहले एक ट्रेलर है। नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की टक्कर के बीच प्रशांत किशोर और चिराग पासवान जैसे नए खिलाड़ी समीकरण बदल सकते हैं।

सत्ताधारी दल के मंत्रियों के बीच पैरवी तेज है, जबकि विपक्षी नेता जदयू में सेंध लगाने को बेताब हैं। अप्रत्याशित चेहरों, जैसे युवा या महिला उम्मीदवारों पर दांव लगने की संभावना है। हालांकि, जीत की संभावना वाले चेहरों पर ही पार्टियां भरोसा करेंगी। प्रचार का दौर उम्मीदवारों की घोषणा के बाद और तेज होगा।

कुल मिलाकर यह चुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जाएगा, बल्कि राजगीर के भविष्य की दिशा भी तय करेगा। यहां पुराने चेहरों का दबदबा कायम रहेगा या नई हवा बहेगी? इसका जवाब 14 नवंबर 2025 को परिणामों के साथ मिलेगा।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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