श्री जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम मंदिर न्यास समिति का पुनर्गठन

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के सीतामढ़ी जिले में माता जानकी की जन्मस्थली पुनौराधाम अब अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तर्ज पर एक भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। माता सीता के भव्य मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के लिए बिहार सरकार ने श्री जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम मंदिर न्यास समिति का पुनर्गठन किया है। इस नौ सदस्यीय समिति के गठन के साथ ही मंदिर निर्माण और क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

मंदिर निर्माण और पुनौराधाम के विकास कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नई न्यास समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष के रूप में बिहार के मुख्य सचिव और उपाध्यक्ष के रूप में विकास आयुक्त को नियुक्त किया गया है।

समिति में अन्य सदस्यों में पुनौराधाम मठ के महंत, पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव, पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव और तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त सीतामढ़ी के जिलाधिकारी (डीएम) को समिति का सचिव और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। न्यास समिति के बैंक खातों का संचालन सचिव और कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। इस संबंध में विधि विभाग के सचिव सह विधि परामर्शी अंजनी कुमार सिंह ने अधिसूचना जारी कर दी है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

पुनौराधाम न्यास समिति के पुनर्गठन और मंदिर के विकास के लिए बिहार हिंदू धार्मिक न्यास (संशोधन) अध्यादेश 2025 के तहत बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 में संशोधन किया गया। यह अध्यादेश 23 मई 2025 को जारी किया गया था, जिसके तहत पूर्ववर्ती न्यास समिति को भंग कर दिया गया। नई समिति के गठन तक सीतामढ़ी के डीएम को अस्थायी रूप से न्यास का प्रबंधन करने का अधिकार सौंपा गया था।

आगामी विधानमंडल के मॉनसून सत्र में इस अध्यादेश को विधिवत अधिनियम का रूप दिया जाएगा। संशोधन का मुख्य उद्देश्य पुनौराधाम को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना है।

नई समिति न्यास और उसकी परिसंपत्तियों का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथ में लेगी और समय-समय पर सरकार को अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपेगी। सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन समिति के लिए अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में अपने एक्स हैंडल पर माता जानकी मंदिर के भव्य डिजाइन को साझा किया था। जिसे नोएडा की एक प्रतिष्ठित निजी फर्म ने तैयार किया है। यह वही फर्म है, जिसने अयोध्या के श्रीराम मंदिर के मास्टर प्लान और वास्तुकला में अपनी विशेषज्ञता प्रदान की थी।

मंदिर परिसर में सीता वाटिका, लव-कुश वाटिका, परिक्रमा पथ, डिस्प्ले कियोस्क, कैफेटेरिया और बच्चों के लिए विशेष जोन जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा, थीम आधारित प्रवेश द्वार और विशाल पार्किंग क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे।

मंदिर के आसपास के क्षेत्र को विकसित करने के लिए 50.5 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। जिसके लिए 120 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 72 करोड़ रुपये और पर्यटकीय सुविधाओं के लिए 67 करोड़ 39 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है।

बता दें कि पुनौराधाम को माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है। यह हिंदू धर्मावलंबियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में राजा जनक के खेत जोतने के दौरान माता सीता यहीं धरती से प्रकट हुई थीं।

इस मंदिर के निर्माण से न केवल बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस परियोजना से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ होगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने बयान में कहा कि पुनौराधाम में मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण हम सभी बिहारवासियों के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है। हम इस परियोजना को शीघ्र पूरा करने के लिए कृतसंकल्पित हैं।

पुनौराधाम का विकास रामायण सर्किट के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अयोध्या और सीतामढ़ी के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध को और मजबूत करना है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद पुनौराधाम को भी उसी भव्यता के साथ विकसित करने की योजना है। मंदिर को सड़क और रेल मार्ग से अयोध्या से जोड़ा जाएगा। जिससे श्रद्धालुओं को दोनों तीर्थ स्थलों की यात्रा करने में सुविधा होगी।

बहरहाल, पुनौराधाम और सीतामढ़ी के स्थानीय निवासियों में इस परियोजना को लेकर अपार उत्साह है। लोगों का कहना है कि वर्षों से इस मांग को लेकर आवाज उठ रही थी, जो अब साकार होने जा रही है। यह परियोजना न केवल धार्मिक महत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सीतामढ़ी को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

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