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राजस्व महा-अभियान: सरकारी लापरवाही से रैयतों की बढ़ी मुश्किलें

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण संवाददाता)। इस्लामपुर प्रखंड अंतर्गत इचहोस गांव के रैयतों को भूमि से संबंधित दस्तावेजों को ठीक करवाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा शुरू किया गया राजस्व महा-अभियान का उद्देश्य भूमि दस्तावेजों को सुधारना और रैयतों को उनकी जमीन से संबंधित सही जानकारी प्रदान करना है। इस गांव में अपनी मंशा पूरी करता नजर नहीं आ रहा है।

रैयतों का कहना है कि इस अभियान के तहत राजस्व कर्मचारियों की ओर से उचित सहायता और जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ गई हैं। इस तरह की शिकायतें कमोवेश प्रखंड की 20 पंचायतों के गांव से मिली हैं।

इचहोस गांव के मनोज कुमार, रामप्रीत पंडित, अनुराधा कुमारी, छोटू कुमार, विनोद पांडेय, मुन्ना शर्मा, मुन्ना पासवान आदि रैयतों ने बताया कि राजस्व कर्मचारी गांव में घर-घर जाकर जानकारी देने में पूरी तरह विफल रहे हैं। सरकार ने इस अभियान के लिए 16 अगस्त से 20 सितंबर तक की समय सीमा निर्धारित की है, लेकिन अब समय धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है और रैयतों को कोई ठोस सहायता नहीं मिल रही।

गांव के मनीचक पंचायत भवन में केवल एक बार शिविर का आयोजन किया गया, जिसे रैयतों ने खानापूर्ति करार दिया। रैयतों का कहना है कि शिविर में कर्मचारियों ने सिर्फ औपचारिकता पूरी की और वहां मौजूद लोगों को उनकी जमीन से संबंधित समस्याओं का समाधान नहीं मिला। जानकारी के अभाव के कारण गांव में भ्रम और अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है। रैयतों का कहना है कि कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश में भी कोई फायदा नहीं हो रहा, क्योंकि कर्मचारी फोन कॉल्स का जवाब नहीं देते।

जानकारी और सहायता के अभाव में रैयतों को वसुधा केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन वहां भी भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण काम सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा। कई रैयतों को इस अभियान के तहत जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं है, जिसके चलते वे अपने जमीन के कागजात सुधारने में असमर्थ हैं।

इस्लामपुर के अंचल अधिकारी (सीओ) किशोरी चौधरी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रैयतों को कर्मचारियों द्वारा जानकारी दी जा रही है और जरूरत के अनुसार शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन समस्याओं को जल्द से जल्द हल करने की कोशिश की जाएगी।

रैयतों का कहना है कि इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को और सक्रियता दिखानी होगी। वे मांग कर रहे हैं कि कर्मचारी गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करें और दस्तावेज सुधारने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही शिविरों की संख्या बढ़ाने और वहां मौजूद कर्मचारियों को अधिक जिम्मेदार बनाने की जरूरत है।

राजस्व महा-अभियान, जो रैयतों के लिए उनकी जमीन से संबंधित समस्याओं को हल करने का एक सुनहरा अवसर हो सकता था, अब समय सीमा के दबाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनके लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इचहोस गांव के साथ अन्य पंचायतों के रैयत भी इस अभियान का लाभ उठाने से वंचित रह सकते हैं।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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