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SC-ST समुदाय को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शुल्क में मिली बड़ी छूट

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोगों को एक बड़ी राहत देते हुए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के विलंबित आवेदन पर लगने वाले शुल्क से छूट देने का ऐलान किया है। यह निर्णय विशेष विकास शिविरों के माध्यम से जन्म-मृत्यु पंजीकरण को आसान और सुलभ बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

बिहार सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (योजना व विकास विभाग) के निदेशक-सह-मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) डॉ. विघा नंद सिंह द्वारा इस संबंध में पत्र जारी किया गया है, जिसे बिहार महादलित विकास मिशन के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को संबोधित किया गया है। इसमें कहा गया है कि विशेष शिविरों में एससी-एसटी वर्ग के आवेदकों से जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए किसी भी प्रकार का विलंब शुल्क नहीं लिया जाएगा।

बता दें कि जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। वहीं 21 से 30 दिन तक ₹2 विलंब शुल्क, 30 दिन से 1 साल तक ₹5 शुल्क, 1 साल से अधिक ₹10 शुल्क लिया जाता है।

अब यह शुल्क अब एससी-एसटी समुदाय को विशेष शिविरों में माफ रहेगा। लेकिन सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए यह शुल्क यथावत रहेगा, क्योंकि इसे केंद्र सरकार के अधिनियम (Birth and Death Registrati,n Act, 1969) के तहत पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

इसके पहले राज्य सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजकर विलंब शुल्क को पूरी तरह खत्म करने की सिफारिश की थी, लेकिन भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कानून में संशोधन के बिना संभव नहीं है। इसलिए यह छूट केवल राज्य स्तर पर विशेष शिविरों के माध्यम से और एससी-एसटी वर्ग तक सीमित की गई है।

अब 2018-19 से बिहार में जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया था। 2022 से यह काम सांख्यिकी विभाग के अधीन पूरी तरह डिजिटल हो गया है। आवेदन के 6 दिनों के भीतर प्रमाणपत्र निर्गत किया जाता है। नगर निगमों, पंचायतों व प्रखंड स्तर पर कंप्यूटर ऑपरेटर तैनात हैं। 21 दिनों के भीतर आवेदन करने पर केवल माता-पिता का आधार और मुखिया/सरपंच की अनुशंसा पर्याप्त है। इसके बाद एफिडेविट और अन्य दस्तावेजों की जरूरत होती है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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