Sogra Waqf Estate: सदस्यों ने आरोपों का किया खंडन, प्रेसवार्ता से नदारत रहे अध्यक्ष-उपाध्यक्ष

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। सोगरा वक्फ इस्टेट (Sogra Waqf Estate) के मोतवल्ली मोख्तारुल हक, सचिव एमबी शहाबुद्दीन, सोगरा कॉलेज स्कूल+2 के सचिव आफताब आलम और नाएब अव्वल सैयद जैद अहमद ने संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोगरा कॉलेज और सोगरा कॉलेज स्कूल+2 से जुड़े कुछ आरोपों का खंडन किया है।

आरोपों का जवाब देते हुए मोतवल्ली मोख्तारुल हक ने कहा कि आरोप लगाया गया था कि कॉलेज के अध्यक्ष और सचिव ने मिलकर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये निकाल लिए। लेकिन ऐसा नहीं है।

स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह राशि कोविड-19 के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए कर्ज के रूप में ली गई थी और इसका हिसाब-किताब रखा गया है। आरोप था कि सोगरा इंटर कॉलेज के लिए अवैध रूप से भवन का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार के सभी नियमों का पालन करते हुए भवन का निर्माण किया जा रहा है। विज्ञान भवन के निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया गया था। भवन का निर्माण प्रबंधन समिति के निर्णय के अनुसार किया जा रहा है और इसकी निगरानी के लिए 5 सदस्यों की समिति भी गठित की गई है।

आरोप था कि कॉलेज में अवैध नियुक्तियां की गई हैं।आपको बता दें कि तत्काल आवश्यकता के आधार पर कुछ लोगों को दैनिक मानदेय पर रखा गया है और भविष्य में नियुक्तियां नियमानुसार की जाएंगी।

आरोप था कि कॉलेज प्रशासन ने इंटरमीडिएट कॉलेज भवन के निर्माण में रोक लगा दी है। प्रबंधन समिति ने भवन निर्माण का प्रस्ताव पहले ही पारित कर दिया है।

आरोप था कि कॉलेज के वर्तमान प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध है। लेकिन ऐसा नही है। प्रो. जमाल अहमद को प्रबंधन समिति ने ही प्रोफेसर इंचार्ज के रूप में नियुक्त किया है।

आरोप था कि सोगरा हाई स्कूल में मरम्मत कार्य में अनियमितता हुई है। मरम्मत कार्य नियमानुसार और कार्यकारिणी समिति की सहमति से कराए गए हैं।

मोतवल्ली मोख्तारुल हक और अन्य सभी सदस्यों ने सभी आरोपों को निराधार बताया और कहा कि वे सोगरा वक्फ इस्टेट और उससे जुड़ी संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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