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एनेस्थेसिया की ओवरडोज दवा से शिक्षिका की मौत, थाना में FIR दर्ज

सरकारी स्कूल की शिक्षिका की मौत न केवल एक परिवार के लिए दुखदायी है, बल्कि यह चिकित्सा क्षेत्र में व्याप्त लापरवाही और नैतिकता के अभाव को भी उजागर करता है। इस मामले में पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है…

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। दीपनगर थाना क्षेत्र में एक निजी क्लिनिक में इलाज के दौरान एक शिक्षिका की मौत ने चिकित्सा लापरवाही का गंभीर मामला सामने लाया है। मृतका नूरसराय थाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव निवासी 48 वर्षीया मधु वर्मा नोसरा मध्य विद्यालय में शिक्षिका थीं।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि ऑपरेशन से पहले दी गई बेहोशी की दवा (एनेस्थेसिया) की ओवरडोज के कारण उनकी मौत हुई। इसके बाद भी क्लिनिक के चिकित्सकों ने लापरवाही बरतते हुए मामले को छिपाने की कोशिश की और मोटी रकम वसूल की। इस मामले में दीपनगर थाने में FIR दर्ज की गई है, और पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

परिजनों के अनुसार मधु वर्मा को पेट दर्द की शिकायत के बाद दीपनगर थाना क्षेत्र के एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद चिकित्सक ने बताया कि उनकी बच्चेदानी का ऑपरेशन करना होगा। चिकित्सक ने दावा किया कि क्लिनिक में ऑपरेशन के लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। शुक्रवार को मधु को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान कोई विशेषज्ञ एनेस्थेसिया चिकित्सक मौजूद नहीं था और सर्जन ने स्वयं बेहोशी की दवा दी। इस दौरान कथित तौर पर दवा की अधिक मात्रा के कारण मधु की मौत हो गई।

मौत के बाद चिकित्सक ने परिजनों को सूचित किया कि मरीज की हालत गंभीर हो गई है। इसके बाद मधु के शव को रामचंद्रपुर स्थित एक अन्य निजी क्लिनिक में स्थानांतरित कर दिया गया।

परिजनों का कहना है कि दूसरे क्लिनिक में भी चिकित्सकों ने इलाज का दिखावा करते हुए घंटों तक मौत की जानकारी छिपाई और इस दौरान मोटी रकम वसूल की। अंततः कुछ घंटों बाद चिकित्सक ने मधु की मौत की पुष्टि की।

मधु के परिजनों ने दोनों क्लिनिकों के चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही और आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहला चिकित्सक एनेस्थेसिया की गलत खुराक देने का जिम्मेदार है, जिससे मधु की जान गई। वहीं दूसरे क्लिनिक ने मृत शरीर पर इलाज का नाटक कर मोटी रकम ऐंठी। दोनों क्लिनिकों ने इलाज के नाम पर भारी-भरकम बिल वसूल किए।

मधु के भाई ने बताया कि हमारी बहन को बचाया जा सकता था, लेकिन चिकित्सकों की लापरवाही और लालच ने उनकी जान ले ली। पहले क्लिनिक में गलत दवा दी गई और फिर दूसरे क्लिनिक में हमें झूठा आश्वासन देकर पैसे लूटे गए।

दीपनगर थानाध्यक्ष राजमणि ने बताया कि परिजनों ने इस मामले में लिखित शिकायत दर्ज की है और थाने में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मधु वर्मा के शव का पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और मौत का सटीक कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने नालंदा जिले में निजी चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि यह पहला मामला नहीं है, जब निजी क्लिनिकों पर लापरवाही और आर्थिक शोषण का आरोप लगा हो। मधु वर्मा की मौत ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा किया है और लोग चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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