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नालंदा के 66 निजी स्कूलों पर लटकी तालाबंदी की तलवार

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के 66 निजी स्कूलों पर तालाबंदी का संकट मंडरा रहा है। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को कड़ा रुख अपनाते हुए अंतिम चेतावनी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अगले 48 घंटों में यू-डायस प्लस पोर्टल पर शत-प्रतिशत छात्रों की प्रगति रिपोर्ट और अन्य आवश्यक जानकारी अपलोड नहीं की गई, तो इन स्कूलों का यू-डायस कोड रद्द कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं उनकी मान्यता भी समाप्त कर दी जाएगी। इस सख्त कदम से जिले के निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है।

शिक्षा विभाग ने बताया कि कई निजी स्कूलों ने बार-बार जारी किए गए निर्देशों के बावजूद यू-डायस प्लस पोर्टल पर जरूरी जानकारी अपलोड करने में लापरवाही बरती है। इस पोर्टल पर स्कूलों को प्रोफाइल एंड फैसिलिटी, टीचर मॉड्यूल और स्टूडेंट मॉड्यूल से संबंधित डेटा अपलोड करना अनिवार्य है। पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन इन स्कूलों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन, अब विभाग ने 66 स्कूलों को अंतिम स्मार पत्र जारी कर 48 घंटे की मोहलत दी है।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) समग्र शिक्षा, मो. शाहनवाज ने कहा, “इन स्कूलों को पत्र निर्गत होने के 48 घंटे के भीतर यू-डायस प्लस 2025-26 पोर्टल पर सभी प्रविष्टियां सुनिश्चित करनी होंगी। इस बार कोई ढील नहीं दी जाएगी। यदि समय सीमा में डेटा अपडेट नहीं हुआ, तो संबंधित स्कूलों को अमान्य घोषित कर दिया जाएगा और उनका यू-डायस कोड व मान्यता रद्द कर राज्य कार्यालय को अग्रसारित कर दिया जाएगा।”

यू-डायस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) प्लस पोर्टल एक ऑनलाइन डेटा मैनेजमेंट सिस्टम है, जिसका उद्देश्य देश भर के स्कूलों और छात्रों से संबंधित जानकारी को डिजिटल रूप में एकत्र करना है। इस पोर्टल पर स्कूलों को न केवल छात्रों की प्रगति रिपोर्ट, बल्कि शिक्षकों, स्कूल सुविधाओं और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी अपलोड करनी होती हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में पहली कक्षा में 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क नामांकन अनिवार्य है। इसके बदले सरकार स्कूलों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। साथ ही, इन छात्रों को सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए स्कूलों को छात्रों की अद्यतन जानकारी सरकार तक पहुंचानी होती है, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे पात्र छात्रों तक पहुंच सके।

यू-डायस प्लस के तहत अब स्टूडेंट डेटा मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगा। इससे किसी भी बच्चे की शैक्षणिक जानकारी कंप्यूटर पर आसानी से उपलब्ध होगी। नए चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए सभी योजनाओं की राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। student.udise.in  पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक छात्र की संपूर्ण जानकारी देखी जा सकेगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई निजी स्कूलों ने समय पर डेटा अपलोड करने में उदासीनता दिखाई है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ छात्रों तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। अब विभाग ने सख्ती बरतते हुए इन स्कूलों को अंतिम मौका दिया है।

यदि ये 66 स्कूल 48 घंटे की समय सीमा में डेटा अपलोड करने में विफल रहते हैं तो उनकी मान्यता रद्द होने का खतरा है। इससे न केवल स्कूलों का संचालन प्रभावित होगा, बल्कि हजारों छात्रों का भविष्य भी अनिश्चितता के भंवर में फंस सकता है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वे डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया में जुटे हैं, लेकिन तकनीकी समस्याओं और संसाधनों की कमी के कारण देरी हो रही है।

शिक्षा विभाग ने इस बार किसी भी तरह की ढील देने से इनकार कर दिया है। विभाग का कहना है कि यू-डायस प्लस सिस्टम शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे लागू करना न केवल स्कूलों की जिम्मेदारी है, बल्कि यह छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने का भी एक जरिया है।

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