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शेखपुरा-बरबीघा-बिहारशरीफ-दनियावां रेल लाइन पर जल्द दौड़ेंगी ट्रेनें

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा और शेखपुरा जिले एवं उसके आसपास के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शेखपुरा-बरबीघा-बिहारशरीफ-दनियावां रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो रहा है और जल्द ही इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होने की उम्मीद है। इस नई रेल लाइन के शुरू होने से न केवल स्थानीय लोगों को यात्रा में सहूलियत होगी, बल्कि क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास भी नई ऊंचाइयों को छूएगा।

रेलवे सूत्रों के अनुसार इस रेलखंड पर पुल-पुलिया का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और रेल पटरियां बिछाने का काम भी लगभग समाप्त हो गया है। वर्तमान में पटरियों पर गिट्टी डालने का कार्य जोर-शोर से चल रहा है, जिससे रेल ट्रैक को और मजबूती मिलेगी। खास बात यह है कि बरबीघा तक गिट्टी लाने के लिए मालगाड़ी का परिचालन भी शुरू हो चुका है।

इस रेलखंड पर एक ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब बीते शनिवार को बिहारशरीफ से बरबीघा होते हुए शेखपुरा जंक्शन तक एक लाइट इंजन सफलतापूर्वक पहुंचा। यह इस रेलखंड पर प्रगति का एक बड़ा संकेत है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रैक का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब कमीशनर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि सब कुछ ठीक रहा तो जलाई 2025 तक इस रेलखंड पर ट्रेनों का नियमित परिचालन शुरू हो सकता है।

यह रेल लाइन नालंदा, शेखपुरा और आसपास के जिलों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। लेकिन यह रेल लाइन इतनी खास क्यों है? यह सवाल स्थानीय निवासियों के मन में भी है। इस रेलखंड के शुरू होने से बिहारशरीफ से शेखपुरा और दनियावां तक की यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इससे न केवल दैनिक यात्री, बल्कि व्यापारी, छात्र, और मरीज भी लाभान्वित होंगे और वे पटना समेत अन्य बड़े शहरों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

हालांकि रेलखंड का अधिकांश काम पूरा हो चुका है, लेकिन बरबीघा रेलवे स्टेशन के निर्माण में अभी कुछ देरी है। बरबीघा में प्लेटफॉर्म निर्माण, लूप लाइन के लिए पॉइंट्स बनाने और फुट ओवरब्रिज के रैंप का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन कार्यों को जल्द पूरा कर लिया जाएगा, ताकि ट्रेन परिचालन में कोई बाधा न आए।

बता दें कि शेखपुरा-बरबीघा-बिहारशरीफ-दनियावां रेल लाइन परियोजना की शुरुआत 2006 में हुई थी, लेकिन मुआवजा विवाद और अन्य तकनीकी बाधाओं के कारण यह परियोजना कई बार रुकी। अब स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से यह परियोजना अंतिम चरण में है।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक सीआरएस निरीक्षण के बाद इस रेलखंड पर पहले मेमू ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। इसके बाद लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का परिचालन शुरू होगा। यह रेलखंड किऊल-गया रेलखंड से भी जुड़ेगा। इससे दिल्ली और हावड़ा जैसे बड़े शहरों तक कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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