राजगीर में होगा भारत-पाकिस्तान का रोमांचक मुकाबला, सेपक टकरा भी स्वीकृत

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के राजगीरइंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में होने वाला महिला विश्वकप कबड्डी चैंपियनशिप पूरे बिहार के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन होगा। इसके आलावे बिहार कैबिनेट ने सेपक टकरा महिला और पुरुष विश्वकप के आयोज न के लिए भी बजट की मंजूरी दे दी है।

महिला विश्वकप कबड्डी चैंपियनशिप में भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित मुकाबले को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। यह मुकाबला पूरे टूर्नामेंट का मुख्य आकर्षण होगा। हालांकि अभी पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

बिहार में दूसरी बार महिला विश्वकप कबड्डी चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले 2012 में पाटलिपुत्र खेल परिसर में यह आयोजन हुआ था। लगभग 13 साल बाद, नवनिर्मित राजगीर खेल परिसर में यह आयोजन 7 से 12 मार्च 2025 के बीच होगा। इस आयोजन के लिए बिहार सरकार ने 8 करोड़ 25 लाख रुपए के बजट को मंजूरी दी है।

राजगीर खेल परिसर में इंडोर और आउटडोर खेलों की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पहले भी एशियन महिला हॉकी चैम्पियनशिप जैसे बड़े टूर्नामेंट सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। महिला कबड्डी विश्वकप के सभी मैच इंडोर स्टेडियम में खेले जाएंगे। जिसकी दर्शक क्षमता 5000 है। सभी टीमों के खिलाड़ियों को खेल अकादमी के नवनिर्मित हॉस्टल में ठहराया जाएगा और उन्हें विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

भारत की महिला कबड्डी टीम चार बार विश्व विजेता रह चुकी है। भारत ने 2012, 2013, 2014 और 2016 में विश्वकप पर कब्जा जमाया था। इस बार भी भारतीय टीम को खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

कैबिनेट ने सेपक टकरा महिला और पुरुष विश्वकप के आयोजन के लिए 13 करोड़ 31 लाख 36 हजार रुपए की मंजूरी दी है। इस खेल के आयोजन की जिम्मेदारी सेपक टकरा फेडरेशन ऑफ इंडिया को सौंपी गई है। जिसे आयोजन के लिए 8 करोड़ रुपए सहित अन्य खर्चों के लिए पूरी राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

सेपक टकरा एक अनोखा खेल है। जिसमें खिलाड़ी प्लास्टिक से बनी बॉल को पैरों, घुटनों, सिर और छाती की मदद से मारकर विरोधी के पाले में पहुंचाते हैं। यह खेल वॉलीबॉल की तरह ही खेला जाता है। लेकिन इसमें हाथों का उपयोग नहीं किया जाता। हर टीम में तीन खिलाड़ी होते हैं और मैच तीन सेटों का होता है।

इन दोनों बड़े आयोजनों से बिहार को खेल के हब के रूप में नई पहचान मिलेगी। खेल प्रेमियों के लिए यह शानदार मौका होगा। जब वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों को अपने राज्य में लाइव देख सकेंगे। सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं और बजट से उम्मीद है कि यह आयोजन बेहद सफल रहेगा और बिहार में खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी।

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