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जरा देखिए, इसके लिए भी बिजली विभाग को ‘सेवा शुल्क’ चाहिए!

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिजली विभाग की घोर लापरवाही और मनमानी का एक नया मामला सामने आया है, जहां अधिकारी अपनी ही गलती सुधारने के लिए ग्रामीणों से ‘सेवा शुल्क’ की मांग कर रहे हैं। मामला सिलाव प्रखंड अंतर्गत निरपुर पंचायत के गोविंदपुर गांव का है, जहां एक बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

तालाब में झूल रहा है जानलेवा तार गांव के लोगों के अनुसार करीब एक वर्ष से 440 वोल्ट का विद्युत प्रवाहित तार एक तालाब में झूल रहा है। यह तार एक क्षतिग्रस्त बिजली पोल से जुड़ा हुआ है। जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने कई बार विद्युत प्रशाखा नालंदा के अधिकारियों को इस बारे में सूचित किया। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लकड़ी के खंभों पर टिकी है विद्युत आपूर्तिः इतना ही नहीं गांव में बिजली आपूर्ति के लिए लकड़ी के खंभों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और तेज़ हवा में ये खंभे गिर सकते हैं। जिससे पूरे गांव में दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

बिजली विभाग की अमानवीय मांगः जब ग्रामीणों ने इस समस्या को हल करने की मांग की तो बिजली विभाग के कर्मियों ने इसे ठीक करने के बदले 25,000 रुपये की मांग कर दी। गांव के लोग आर्थिक रूप से इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थ हैं। जिसके कारण यह गंभीर समस्या जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों में आक्रोशः गांव के लोगों में इस लापरवाही और जबरन वसूली को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द से जल्द इस मामले को नहीं सुलझाया गया तो वे मजबूरन आंदोलन करेंगे और इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करेंगे।

प्रशासन कब लेगा संज्ञान? यह मामला बिजली विभाग की उदासीनता और भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। जब ग्रामीणों ने विभाग से मदद मांगी तो उनसे ‘सेवा शुल्क’ के नाम पर पैसे मांगे गए। अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन कब इस लापरवाही पर ध्यान देगा और ग्रामीणों को सुरक्षित विद्युत सेवा उपलब्ध कराएगा?

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