नालंदा की एक नई उड़ान है बिहार खेल विश्वविद्यालय राजगीर

नालंदा दर्पण डेस्क। पांच पहाड़ियों से घिरा राजगीर जहां कभी भगवान बुद्ध और महावीर ने अपने उपदेशों से विश्व को आलोकित किया, आज एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। नालंदा कभी प्राचीन विश्वविद्यालय के रूप में विश्व भर के विद्वानों का केंद्र था। अब बिहार खेल विश्वविद्यालय के रूप में खेल और शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय जोड़ रहा है। यह विश्वविद्यालय बिहार खेल विश्वविद्यालय अधिनियम 2021 के तहत स्थापित हुआ है, जो बिहार को वैश्विक खेल मानचित्र पर स्थापित करने का संकल्प लेता है।
नालंदा का नाम सुनते ही मन में प्राचीन भारत की वह छवि उभरती है, जहां ज्ञान की ज्योति जलती थी। 5वीं से 12वीं शताब्दी तक, नालंदा विश्वविद्यालय ने दर्शन, विज्ञान, और बौद्धिक चिंतन के क्षेत्र में विश्व को दिशा दी। राजगीर मगध साम्राज्य की पहली राजधानी थी, भगवान बुद्ध की तपस्थली गृद्धकूट पर्वत और वेणुवन विहार का साक्षी रहा है। यह वही भूमि है जहां सम्राट बिंबिसार ने बुद्ध को वेणुवन भेंट किया था।
बता दें कि 29 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में बिहार खेल विश्वविद्यालय और राज्य खेल अकादमी का उद्घाटन किया। 72 एकड़ के विशाल परिसर में फैला यह विश्वविद्यालय 24 खेल विधाओं, जैसे- क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, एथलेटिक्स, और स्विमिंग के लिए प्रशिक्षण की विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति शिशिर सिन्हा और रजिस्ट्रार रजनीकांत के नेतृत्व में, यह संस्थान न केवल शारीरिक शिक्षा और खेल विज्ञान में स्नातक और डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है, बल्कि 2025-26 शैक्षणिक सत्र से युवाओं को खेल और शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त बनाने का लक्ष्य रखता है।
विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जनवरी 2025 में मान्यता प्राप्त हुई, जिसने इसे यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 2(एफ) के तहत प्रतिष्ठित संस्थानों की सूची में शामिल किया। यह मान्यता बिहार के युवाओं के लिए खेल और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों का द्वार खोलती है।
राजगीर का खेल परिसर पहले ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ चुका है। मई 2025 में यहां खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 का आयोजन हुआ, जिसमें 27 खेलों में देश भर के युवा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कबड्डी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ और राजस्थान की महिला टीमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।
इसके अलावा नवंबर 2024 में राजगीर ने एशियन महिला हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी की और अगस्त 2025 में एशिया रग्बी अंडर-20 सेवेन्स चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है।
परिसर का सबसे चर्चित हिस्सा है इसका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम। इसके लिए बिहार सरकार ने 1131 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। 40000 दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम वानखेड़े और ईडन गार्डन जैसे मैदानों को टक्कर देने के लिए तैयार है।
बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश तिवारी के अनुसार यह स्टेडियम रणजी ट्रॉफी, आईपीएल और अंतर्राष्ट्रीय मैचों की मेजबानी करेगा, जिससे बिहार के खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर वैश्विक अवसर मिलेंगे।
क्योंकि बिहार खेल विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है। यह बिहार के युवाओं के सपनों को उड़ान देने का मंच है। राजगीर कभी बुद्ध के उपदेशों से गूंजता था। अब युवा खिलाड़ियों की जीत की गूंज से जीवंत होगा। विश्वविद्यालय का लक्ष्य न केवल खेल प्रतिभाओं को निखारना है, बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार करना है।





