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HC-CS के आदेशों की धज्जियाँ, स्कूल मैदान में फिर लगा डिज्नीलैंड मेला!

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। बिहार में अगर उच्च न्यायालय (HC) और प्रधान सचिव (CS) के आदेश भी ज़मीनी स्तर पर मज़ाक बन जाएं तो सवाल सिर्फ एक मेला का नहीं रह जाता, बल्कि सवाल कानून के अस्तित्व और सुशासन की साख का बन जाता है।Ignoring the High Court orders a Disneyland themed fair has been set up again in the school grounds 2

नालंदा जिले के इस्लामपुर से सामने आया यह मामला अब सीधे-सीधे न्यायपालिका बनाम प्रशासन की टकराहट जैसा दिख रहा है, जहाँ आदेश लिखे कागज़ों में कैद हैं और ज़मीन पर मनमानी चल रही है।

जुलाई 2022 में श्री सुभाष उच्च+2 विद्यालय, इस्लामपुर के मैदान में लगे डिज्नीलैंड मेला को लेकर जब जनता ने आवाज़ उठाई तो तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा ने खुद स्वीकार किया कि विद्यालय परिसर में मेला लगाना नियम विरुद्ध है। प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई हुई। मेला हटाया गया और आदेश साफ था कि विद्यालय परिसर का व्यावसायिक उपयोग नहीं होगा।

मामला यहीं नहीं रुका। मेला संचालक पटना उच्च न्यायालय पहुँचा और वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। माननीय न्यायाधीश ने याचिका खारिज करते हुए विद्यालय मैदान से डिज्नीलैंड हटाने का स्पष्ट आदेश दे दिया।Ignoring the High Court orders a Disneyland themed fair has been set up again in the school grounds 4

इसके समानांतर प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह का 2009 का लिखित आदेश पहले से मौजूद है। जिसमें साफ कहा गया है कि विद्यालय भवन या परिसर का उपयोग शादी, मेला या अन्य कार्यक्रमों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है।

सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक सवाल यही है। जब वही मैदान, वही मेला और वही नियम हैं तो 2025 में वर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा ने डिज्नीलैंड मेला के लिए NOC और लाइसेंस की सिफारिश कैसे कर दी?

क्या हाईकोर्ट का आदेश अब वैकल्पिक हो गया है? प्रधान सचिव के आदेश की कोई वैधानिक कीमत नहीं बची? या फिर प्रशासनिक कुर्सी बदलते ही नियम भी बदल जाते हैं? यह सिर्फ अनुमति नहीं, बल्कि न्यायपालिका और विभागीय आदेशों की खुली अवहेलना है।Ignoring the High Court orders a Disneyland themed fair has been set up again in the school grounds 3

इस्लामपुर की जनता सीधे-सीधे पूछ रही है कि अगर 2022 में मेला गलत था, तो 2025 में सही कैसे हो गया? अगर 2025 में सही है, तो 2022 में प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई क्यों हुई? किस अधिकारी ने नियमों का पालन किया और किसने उनका उल्लंघन?

यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि एक ही काम के लिए दो अलग-अलग समय पर दो अलग-अलग फैसले लिए गए और दोनों फैसले सरकारी अफसरों ने ही लिए। जिस मैदान को बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित खेल व व्यायाम स्थल बताया गया था, वही मैदान बार-बार डिज्नीलैंड मेला के लिए चुना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में अन्य मैदान मौजूद हैं। फिर भी विद्यालय परिसर को ही क्यों चुना जाता है? क्या इसलिए कि यहां सेटिंग आसान है? यह सवाल अब संभावित मिलीभगत की ओर भी इशारा कर रहा है।Ignoring the High Court orders a Disneyland themed fair has been set up again in the school grounds 1 1

अब बिहार सरकार जहां एक ओर शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा और खेल को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उच्च+2 विद्यालय के मैदान को व्यावसायिक मेला स्थल बना देना इन दावों को खोखला साबित करता है। अगर आज स्कूल मैदान में मेला लगेगा तो कल क्या स्कूल भवन में शादी होगी?

इस्लामपुर की जनता अब सिर्फ जांच नहीं, बल्कि सीधे जवाब चाहती है कि किस अधिकारी ने हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी की? किस आधार पर NOC और लाइसेंस की सिफारिश की गई? क्या इसके पीछे राजनीतिक या आर्थिक दबाव था? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा?

बहरहाल यह मामला अब एक मेला का नहीं, बल्कि कानून बनाम प्रशासनिक मनमानी का है। अगर इस पर चुप्पी रही, तो यह संदेश जाएगा कि बिहार में आदेश ताक पर रखे जा सकते हैं । बस सही कुर्सी और सही समय चाहिए।

Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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