
राजगीर (नालंदा दर्पण)। नगर परिषद राजगीर के वार्ड संख्या 21 अंतर्गत पछियरिया टोला में स्थित सरकारी सार्वजनिक शौचालय को लेकर इन दिनों विवाद गहराता जा रहा है। सार्वजनिक उपयोग की इस संपत्ति पर कथित रूप से दबंगों द्वारा कब्जा किए जाने के प्रयास के विरोध में मोहल्ले के महिला-पुरुष बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए और अनुमंडल कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया तथा जन-हस्ताक्षरित ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि करीब पांच दशक पूर्व सरकार द्वारा पछियरिया टोला में इस सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। वर्षों से मोहल्ले के सैकड़ों परिवार इसका नियमित रूप से उपयोग करते आ रहे हैं। बावजूद इसके कुछ लोग इसे अपनी निजी संपत्ति बताकर चारदीवारी का निर्माण करा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को शौचालय के उपयोग से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।
नागरिकों ने आरोप लगाया कि कब्जे की नीयत से शौचालय के चारों ओर घेराबंदी की जा रही है और विरोध करने पर शौचालय को तोड़ने तक की धमकी दी जा रही है। इससे मोहल्ले में भय और आक्रोश का माहौल है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को शौचालय बंद हो जाने की स्थिति में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व भी इसी शौचालय पर अवैध कब्जा करने का प्रयास हुआ था। उस समय तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी और नगर कार्यपालक पदाधिकारी के हस्तक्षेप से मामले को शांत कराया गया था और निर्माण कार्य रुकवाया गया था। अब एक बार फिर वही तत्व सक्रिय हो गए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि शौचालय से सटी एक निजी जमीन है, जिसका कुछ हिस्सा पहले ही बेचा जा चुका है। बताया गया कि संबंधित प्लॉट का कुछ भाग दक्षिण दिशा की ओर सड़क में भी दर्शाया जा रहा है।
नागरिकों का आरोप है कि जमीन की नापी में गंभीर गड़बड़ी की आशंका है और जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े लोग ही चारदीवारी निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि सार्वजनिक संपत्ति को हड़पने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि अविलंब निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जमीन की नापी कराई जाए तथा सार्वजनिक शौचालय को सुरक्षित रखा जाए। ताकि आमजन पूर्व की तरह उसका उपयोग कर सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस संबंध में दिए गए ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी तथा अंचल पदाधिकारी राजगीर को भी भेजी गई है। ज्ञापन पर शंकर राजवंशी, अजय राजवंशी, सिको राजवंशी, चांदनी कुमारी, सुनीता देवी, रूपा देवी, शिव कुमार, उमेश प्रसाद सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के हस्ताक्षर हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब देखना यह है कि सार्वजनिक संपत्ति को लेकर उठे इस विवाद में प्रशासन कितनी तत्परता से कदम उठाता है।







