Big Exclusive Story: किसानों के लिए अभिशाप बना नल-जल योजना, जफरा में 10 एकड़ उपजाऊ जमीन हुआ बेकार

Nal Jal Yojana और Drainage Problem से 10-15 बीघा उपजाऊ जमीन बनी झील, Nalanda Farmers Crisis गहराया

बेन (नालंदा दर्पण)। बेन प्रखंड की अरावां पंचायत के अंतर्गत आने वाला जफरा गांव (Big Exclusive Story) इन दिनों जलजमाव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। गांव से निकलने वाले नाले और नल-जल योजना के बेतरतीब बहाव ने यहां की उपजाऊ जमीन को बीते पांच वर्षों से पानी में डुबो रखा है। हालात यह हैं कि करीब 10 से 15 बीघे यानी लगभग 10 एकड़ से अधिक भूमि पर खेती पूरी तरह ठप हो चुकी है।Waterlogging farmland  Crop loss Nalanda

खेत बने झील, फसलें सड़कर बर्बादः ग्रामीणों के अनुसार गांव की नालियों का दूषित पानी बिना किसी ठोस जलनिकासी व्यवस्था के सीधे किसानों के खेतों में गिर रहा है। नल-जल योजना की टोंटियां अक्सर खुली रहने से अतिरिक्त पानी लगातार बहता रहता है, जो नालियों के रास्ते खेतों में पहुंचकर जलजमाव की स्थायी स्थिति पैदा कर देता है।

पिछले वर्ष कुछ किसानों ने जोखिम उठाते हुए गेहूं की बुवाई की थी, लेकिन लगातार पानी लगे रहने से पूरी फसल सड़ गई। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। बीज, खाद और मजदूरी का खर्च भी डूब गया और उत्पादन भी शून्य रहा।

बरदान से अभिशाप बनी उपजाऊ धरतीः कभी यही जमीन गांव की सबसे उपजाऊ भूमि मानी जाती थी। धान, गेहूं और दलहन की अच्छी पैदावार होती थी। लेकिन जलनिकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह जमीन अब स्थायी जलभराव से ग्रस्त होकर ‘झील’ का रूप ले चुकी है।Nalanda Farmers Crisis

किसान सकल सिंह, त्रिवेणी सिंह, करण सिंह, उदित नारायण सिंह, संजय सिंह, ओमप्रकाश सिंह, टुन्नू सिंह, नवल सिंह, शत्रुघ्न सिंह, रविन्द्र सिंह, जितेन्द्र सिंह और अरविन्द सिंह सहित दर्जनभर किसानों ने बताया कि जलजमाव के कारण वे पिछले पांच वर्षों से खेती नहीं कर पा रहे हैं।

किसान मुकेश सिंह, रामनंदन सिंह, चुन्नू सिंह, रामजतन सिंह और पप्पू सिंह ने कहा कि हर मौसम में खेतों में पानी भरा रहता है, जिससे बुवाई तक संभव नहीं हो पाती। स्थिति यह है कि उनकी 10 एकड़ से अधिक भूमि परती पड़ी है।

प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ रहा रोषः ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। न तो स्थायी नाला निर्माण हुआ और न ही जलनिकासी के वैकल्पिक उपाय अपनाए गए।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में उपजाऊ भूमि पूरी तरह बंजर हो सकती है।

सतेन्द्र सिंह, चनसुर पाल, गणेश पाल, शंभू सिंह, सतीश सिंह, उमा सिंह और हरवंश नारायण सिंह सहित कई किसानों ने सरकार और प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।Nalanda agriculture loss Drainage issue Bihar

संभावित समाधान क्या? विशेषज्ञों के अनुसार समस्या के समाधान के लिए  समुचित गहराई और ढलान वाला पक्का नाला निर्माण, नल-जल के अपव्यय पर नियंत्रण और नियमित निगरानी, जल निकासी हेतु खेतों के किनारे अस्थायी ड्रेनेज चैनल, पंचायत स्तर पर जल प्रबंधन की सामुदायिक योजना जैसे कदम उठाए जाने जरूरी हैं।

फिलहाल जफरा के किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी डूबी हुई जमीन फिर से लहलहाएगी। लेकिन सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा और किसानों की पांच साल पुरानी इस पीड़ा का समाधान कब निकलेगा? स्रोतः नालंदा दर्पण डेस्क / रामावतार कुमार

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नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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