पैन और APAAR ID के बिना नहीं होगा नामांकन, हजारों छात्रों पर संकट

No Admission Without PEN and APAAR ID, Thousands of Students Likely to Be Affected in Nalanda. Education Department makes PEN and APAAR ID mandatory for 2026-27 school admissions and transfer certificates.

“अब इस सख्ती का असर वास्तविक छात्रों पर भी पड़ने लगा है, जिससे अभिभावकों में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है…

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सरकारी विद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया 06 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इससे पहले शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों ने हजारों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परमानेंट एजुकेशन नंबर (PEN) और अपार आईडी (APAAR ID) के बिना बच्चों का अगले विद्यालय या अगली कक्षा में नामांकन संभव नहीं होगा।

जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रत्येक बच्चे का नामांकन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। हालांकि विभागीय आदेश के अनुसार इस बार बिना पैन और अपार आईडी वाले छात्रों का नामांकन नहीं लिया जाएगा। इस निर्णय से जिले के हजारों छात्र प्रभावित हो सकते हैं, खासकर वे बच्चे जिनका आधार कार्ड अब तक विद्यालय में जमा नहीं कराया गया है।

जानकारी के अनुसार अपार आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। कई अभिभावकों द्वारा आधार विवरण जमा नहीं करने के कारण स्कूल बच्चों का अपार आईडी और पैन नंबर तैयार नहीं कर सके हैं। सरकारी विद्यालयों में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है, जबकि निजी विद्यालयों में यह समस्या अधिक गंभीर है।

विद्यालय बदलने वालों के लिए बढ़ी परेशानीः विद्यालय बदलने की स्थिति में छात्र को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) लेना आवश्यक होता है। विभाग ने निर्देश दिया है कि इस प्रमाण पत्र पर छात्र का पैन नंबर और अपार आईडी दर्ज होना अनिवार्य होगा। इनके बिना किसी भी विद्यालय में नामांकन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा, जो पांचवीं के बाद छठी में दूसरे विद्यालय में प्रवेश लेना चाहते हैं या आठवीं के बाद नौवीं में नए स्कूल में नामांकन कराना चाहते हैं। ऐसे हजारों छात्रों के सामने अब नामांकन का संकट खड़ा हो गया है।

दोहरे नामांकन पर रोक के लिए सख्तीः शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम दोहरे नामांकन को रोकने के लिए उठाया गया है। पूर्व में कई मामलों में पाया गया था कि छात्र सरकारी विद्यालयों में केवल योजनाओं का लाभ लेने के लिए नामांकित थे, जबकि पढ़ाई निजी विद्यालयों में कर रहे थे।

इसी को देखते हुए तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने पैन और अपार आईडी को अनिवार्य किया था। विभाग का दावा है कि इससे दोहरे नामांकन के मामलों में काफी कमी आई है और विद्यालयों में छात्रों की वास्तविक संख्या सामने आई है।

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