
सबसे गंभीर आरोप यह है कि मामले की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अनुमंडल पदाधिकारी के संज्ञान में होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। इससे प्रशासनिक स्तर पर यह सवाल स्वाभाविक है कि शिकायत या आपत्ति की जानकारी मिलने के बाद स्थल निरीक्षण, कार्य की गुणवत्ता जांच और भुगतान पर निगरानी के लिए क्या कदम उठाए गए।
नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। नगरनौसा प्रखंड की रामपुर पंचायत अंतर्गत लोदीपुर गांव के वार्ड संख्या-6 में चल रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और वार्ड सदस्य की ओर से नालंदा जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर योजना की जांच कराने तथा अनियमितता मिलने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के साथ निर्माण स्थल की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें ईंट से नाली की दीवार खड़ी किए जाने, जगह-जगह बिखरी ईंटों और अधूरे निर्माण की स्थिति दिखाई दे रही है। इस योजना की कार्य स्थल पर कोई सूचना पट्ट भी नहीं लगाई गई है, ताकि ग्रामीणों को योजना की वास्तविक जानकारी मिल सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 5.60 लाख रुपये की प्रस्तावित लागत वाली इस योजना में स्वीकृत प्रावधान के अनुरूप काम नहीं कराया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि लोदीपुर गांव में पूरब से पश्चिम दिशा में जाने वाली ग्रामीण सड़क के पार पानी की निकासी के लिए होम पाइप बिछाने का प्रावधान था, लेकिन इसके बजाय बीच में ईंट-सीमेंट से खुली नाली का निर्माण कराया जा रहा है।
तीन महीने तक सड़क खोदकर छोड़ने का आरोप
शिकायत के मुताबिक लगभग तीन महीने पहले उक्त ग्रामीण सड़क के बीच जेसीबी से गहरी खुदाई की गई थी। खुदाई के बाद रास्ते को लंबे समय तक उसी स्थिति में छोड़ दिए जाने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। अब करीब तीन दिन से दोबारा निर्माण कार्य शुरू किए जाने की बात शिकायतकर्ताओं ने कही है।
हालांकि, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि काम दोबारा शुरू होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मौके की तस्वीरों में नाली की दोनों ओर ईंट की दीवारें बनी दिखाई देती हैं, जबकि कई स्थानों पर ईंटें टूटी-बिखरी पड़ी हैं। नाली के तल में पानी जमा होने की स्थिति भी नजर आ रही है।
सवाल सिर्फ ईंट की गुणवत्ता का नहीं, योजना के स्वरूप का भी
इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ग्रामीणों की आपत्ति केवल निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। शिकायत में मूल रूप से होम पाइप के माध्यम से सड़क के नीचे जलनिकासी व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है, जबकि स्थल पर दिखाई दे रहा निर्माण एक लंबी खुली ईंट की नाली के रूप में सामने आता है।
ऐसे में जांच का मुख्य बिंदु यह होना चाहिए कि प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी प्राक्कलन और स्थल पर कराए जा रहे वास्तविक कार्य में क्या समानता है। यदि प्राक्कलन में पाइप आधारित क्रॉस-ड्रेनेज का प्रावधान है और वास्तविकता में अलग संरचना तैयार की जा रही है तो यह तकनीकी एवं वित्तीय दोनों स्तरों पर जांच का विषय बन सकता है।
जेसीबी से खुदाई के बाद बदला निर्माण का स्वरूप?
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पहले जेसीबी से सड़क की खुदाई कर दी गई थी और काफी समय तक उसे अधूरा छोड़ दिया गया। अब उसी स्थान पर निर्माण शुरू हुआ है। इससे यह सवाल भी उठता है कि योजना के क्रियान्वयन में पहले से कोई स्पष्ट कार्ययोजना थी या निर्माण कार्य परिस्थितियों के अनुसार बदला जा रहा है।
मौके की तस्वीरों में नाली के किनारे खुदी हुई मिट्टी, असमतल रास्ता, निर्माण सामग्री के अवशेष और कई बिखरी ईंटें दिखाई दे रही हैं। आलावे ईंट, सीमेंट-बालू का अनुपात, नींव की गहराई, नाली की चौड़ाई-गहराई, ढाल, पाइप का व्यास और स्वीकृत प्राक्कलन से वास्तविक कार्य अलग दिखाई दे रही है।
स्टीमेट बनाने वाले पदाधिकारी को लेकर भी शिकायत
ग्रामीणों की शिकायत में योजना के स्टीमेट से जुड़े तत्कालीन पदाधिकारी पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिस पदाधिकारी ने योजना का स्टीमेट तैयार किया था, वह बाद में कथित अनियमितताओं के कारण पद से हटाई जा चुकी हैं। यही कारण है कि पूरे मामले में स्टीमेट की प्रति, प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, कार्यादेश और भुगतान संबंधी अभिलेख सामने आना जांच को निर्णायक दिशा दे सकता है।
मुखिया और पंचायत सेवक की भूमिका पर भी सवाल
शिकायत में कहा गया है कि वर्तमान में निर्माण कार्य पंचायत के मुखिया और पंचायत सेवक के स्तर से कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि योजना की स्थल जांच कराकर वास्तविकता सामने लाई जाए और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो उचित कार्रवाई की जाए।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि मामले की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अनुमंडल पदाधिकारी के संज्ञान में होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। इससे प्रशासनिक स्तर पर यह सवाल स्वाभाविक है कि शिकायत या आपत्ति की जानकारी मिलने के बाद स्थल निरीक्षण, कार्य की गुणवत्ता जांच और भुगतान पर निगरानी के लिए क्या कदम उठाए गए।
फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत ने 5.60 लाख रुपये की इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर पारदर्शिता और गुणवत्ता का सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। यदि जिलाधिकारी स्तर से तकनीकी टीम गठित कर स्थल निरीक्षण और अभिलेखों का मिलान कराया जाता है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला वास्तव में निर्माण की अनियमितता का है अथवा स्वीकृत योजना के अनुरूप ही कार्य कराया जा रहा है।
- पहले JCB से खोदी सड़क, फिर हुआ जियो टैग! लोदीपुर में ‘विकास के गड्ढे’ ने खड़े किए गंभीर सवाल
- 2 करोड़ की उड़ाही के बाद भी सूखा जलाशय, आधे तालाब की खुदाई में पूरी हुई योजना?






