इस्लामपुर में प्रसूता की मौत पर बवाल, 3 घंटे तक गया सड़क मार्ग जाम
नवजात बच्ची को दूसरे अस्पताल में कराया गया भर्ती, परिजनों ने चिकित्सक पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की; पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर नगर के गया रोड स्थित एक निजी चिकित्सा केंद्र में प्रसव के बाद एक प्रसूता की मौत हो जाने से सोमवार को आक्रोश भड़क उठा। मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने चिकित्सा केंद्र के बाहर जमकर हंगामा किया तथा चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए इस्लामपुर-गया सड़क मार्ग को करीब तीन घंटे तक जाम कर दिया। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा।
प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह जाम हटाया गया, जिसके बाद इस्लामपुर-गया मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
प्रसव पीड़ा के बाद सरकारी अस्पताल पहुंची थी महिला
परिजनों के अनुसार सोनमा गांव की फुलवंती कुमारी की ननद संजू कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर पहले सरकारी अस्पताल ले जाया गया था। परिजनों का कहना है कि वहां चिकित्सकों ने महिला को रेफर कर दिया। इसी दौरान एक आशाकर्मी की सलाह पर संजू को इस्लामपुर के गया रोड स्थित एक निजी चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया।
परिजनों के मुताबिक निजी केंद्र में महिला का ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के बाद नवजात बच्ची की स्थिति को देखते हुए उसे एकंगरसराय के एक अस्पताल में शीशे/नवजात देखभाल कक्ष में भर्ती कराया गया है।
लेकिन प्रसव के बाद संजू कुमारी की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इसके लिए संबंधित चिकित्सक और चिकित्सा केंद्र की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
मौत के बाद कथित तौर पर चिकित्सक फरार
महिला की मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उनका आरोप है कि घटना के बाद संबंधित चिकित्सक चिकित्सा केंद्र से निकलकर फरार हो गया। इसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया और दोषी के खिलाफ कार्रवाई तथा मृतका के परिवार को मुआवजा देने की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए।
मृतका के भैसुर रवि बिंद ने आरोप लगाया कि लोगों की जान बचाने के नाम पर चल रहे कुछ निजी चिकित्सा केंद्रों में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। उनका कहना था कि यदि समय रहते उचित चिकित्सा व्यवस्था और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती तो ऐसी घटना को टाला जा सकता था।
तीन घंटे तक सड़क पर ठप रहा आवागमन
मृतका के परिजन और ग्रामीण सड़क पर बैठ गए, जिससे इस्लामपुर-गया मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आक्रोशित लोगों को समझाने का प्रयास किया। काफी समझाने-बुझाने और कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद लगभग तीन घंटे बाद जाम हटाया गया। इसके बाद यातायात बहाल हुआ।
इस्लामपुर थानाध्यक्ष रण विजय कुमार ने बताया कि महिला के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मृतका का पति बाहर करता है मजदूरी
बताया जाता है कि संजू कुमारी की शादी जहानाबाद जिले के ठीकरौर गांव निवासी संदीप उर्फ सरदीप बिंद के साथ हुई थी। परिजनों के अनुसार, मृतका का पति बाहर रहकर काम करता है। प्रसव के दौरान पत्नी की मौत की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
एक ओर परिवार नवजात बच्ची के सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित है, वहीं दूसरी ओर प्रसूता की मौत ने निजी चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा के पूर्व प्रत्याशी ने उठाए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल
घटना पर भाजपा के पूर्व प्रत्याशी वीरेंद्र गोप ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस्लामपुर में कुछ दिन पहले भी एक निजी चिकित्सा केंद्र में कथित चिकित्सकीय लापरवाही से महिला की मौत का मामला सामने आया था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी चिकित्सा केंद्रों की निगरानी और कार्रवाई को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।
वीरेंद्र गोप ने राज्य सरकार से इस्लामपुर समेत पूरे क्षेत्र में नियमों के विपरीत अथवा बिना पर्याप्त मानकों के संचालित हो रहे चिकित्सा केंद्रों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
एक मौत ने खड़े किए कई बड़े सवाल
इस घटना को केवल एक निजी चिकित्सा केंद्र में हुई मौत के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। ग्रामीण और छोटे शहरों में निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर बड़ी संख्या में मरीज निर्भर हैं। खासकर प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में मरीज और उनके परिजन अक्सर सरकारी अस्पताल से रेफर होने के बाद निजी संस्थानों का रुख करते हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित निजी चिकित्सा केंद्र के पास प्रसव और ऑपरेशन कराने की वैध अनुमति, प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम, आपातकालीन सुविधा और जटिल स्थिति से निपटने की पर्याप्त व्यवस्था थी? यदि महिला की हालत ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तो उसे समय पर उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर किया गया या नहीं, यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होगा।
इसके अलावा जिस आशाकर्मी की सलाह पर महिला को निजी चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराने की बात परिजन बता रहे हैं, उसकी भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है। हालांकि, इन सभी सवालों के जवाब जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के बाद ही स्पष्ट होंगे।
जांच से ही सामने आएगा मौत का वास्तविक कारण
फिलहाल परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उपचार से संबंधित रिकॉर्ड, ऑपरेशन के दौरान की स्थिति और चिकित्सा केंद्र की वैधता की जांच के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
घटना के बाद एक बार फिर इस्लामपुर में निजी चिकित्सा केंद्रों की निगरानी, उनकी वैधता और प्रसूता मरीजों के लिए उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले को महज विवाद तक सीमित रखता है या पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करता है।
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