DM उदिता सिंह के सख्त निर्देश: छठ पर जीरो ड्राउनिंग का लक्ष्य, अवैध क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई
छठ घाटों पर बैरिकेडिंग और गोताखोरों की होगी तैनाती, नवंबर में पंचायत स्तर पर शिविर और राजगीर महोत्सव की तैयारियों पर भी प्रशासन की नजर।

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए नालंदा जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी (DM) उदिता सिंह ने प्रशासनिक समीक्षा बैठक और ‘मीटिंग विद द प्रेस’ के दौरान जिले के अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
इस बार प्रशासन ने छठ महापर्व के दौरान डूबने से होने वाली मौतों को पूरी तरह रोकने के लिए ‘जीरो ड्राउनिंग’ (Zero Drowning) का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं, जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अवैध और बिना निबंधन संचालित हो रहे निजी क्लीनिकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासन की इन तैयारियों से स्पष्ट है कि आगामी दिनों में छठ घाटों की सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी तक कई स्तरों पर विशेष अभियान चलाया जाएगा।
छठ घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, जीरो ड्राउनिंग पर रहेगा जोर
छठ महापर्व के दौरान लाखों श्रद्धालु विभिन्न नदियों, तालाबों, पोखरों और जलाशयों में भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दौरान गहरे पानी, फिसलन और भीड़भाड़ के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी उदिता सिंह ने जिले के सभी प्रमुख छठ घाटों और जलाशयों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
निर्देश के अनुसार संवेदनशील और गहरे पानी वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग कराई जाएगी। श्रद्धालुओं को पानी की गहराई के प्रति सतर्क करने के लिए जगह-जगह चेतावनी संकेतक लगाए जाएंगे। इसके अलावा आवश्यकतानुसार प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती भी की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य छठ पूजा के दौरान किसी भी श्रद्धालु की डूबने से मौत नहीं होने देना है। इसके लिए संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ काम करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अवैध क्लीनिकों के खिलाफ चलेगा विशेष अभियान
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। जिले के विभिन्न इलाकों में संचालित अवैध और बिना निबंधन वाले निजी क्लीनिकों पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।
बिना आवश्यक पंजीकरण और निर्धारित मानकों के संचालित स्वास्थ्य संस्थान आम लोगों की सेहत और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे संस्थानों में योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता, मरीजों के इलाज की व्यवस्था और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
इसी के मद्देनजर प्रशासन ने ऐसे क्लीनिकों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका अहम होगी। संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे जिले में संचालित निजी क्लीनिकों की जांच करें तथा आवश्यक पंजीकरण और निर्धारित मानकों का अनुपालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
प्रशासन के इस कदम से अवैध रूप से स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वालों में हड़कंप मचने की संभावना है। साथ ही आम लोगों को बेहतर और सुरक्षित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नवंबर 2026 में पंचायतों तक पहुंचेगा प्रशासन, योजनाओं की होगी जांच
जिलाधिकारी उदिता सिंह का नवंबर 2026 का आधिकारिक भ्रमण कार्यक्रम भी जारी किया गया है। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक गतिविधियों को गति देने और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने पर विशेष जोर रहेगा।
कार्यक्रम के तहत पंचायत स्तर पर जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित शिविर आयोजित करने, विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा करने और योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
पंचायत स्तर पर शिविरों के आयोजन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान सुनिश्चित करना है। इससे ग्रामीणों को अपनी शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार जिला मुख्यालय का चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
वहीं, विभागीय जांच के माध्यम से विकास योजनाओं की प्रगति, सरकारी कार्यों की गुणवत्ता और अधिकारियों की जवाबदेही की समीक्षा की जाएगी।
राजगीर महोत्सव की तैयारियों पर भी प्रशासन की नजर
नालंदा जिले के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल राजगीर में आयोजित होने वाले आगामी राजगीर महोत्सव को लेकर भी प्रशासनिक तैयारियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
राजगीर महोत्सव न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का बड़ा मंच है, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय कारोबार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।
ऐसे में महोत्सव के सफल आयोजन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, व्यवस्थाओं की समीक्षा और आवश्यक प्रशासनिक तैयारियों को समय पर पूरा करना जरूरी होगा।
जिलाधिकारी के नवंबर माह के भ्रमण कार्यक्रम में राजगीर महोत्सव से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियों को भी शामिल किया गया है। इससे आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी और तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर रहने की उम्मीद है।
प्रशासनिक सख्ती से आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?
जिला प्रशासन की ओर से जारी इन निर्देशों का सीधा संबंध आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधाओं से है। छठ घाटों पर बैरिकेडिंग, गहरे पानी के संकेतक और गोताखोरों की तैनाती से श्रद्धालुओं की सुरक्षा मजबूत होगी। वहीं अवैध क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई से मरीजों को अनधिकृत चिकित्सा व्यवस्था के संभावित खतरों से बचाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा पंचायत स्तर पर जनकल्याणकारी शिविर और विभागीय जांच से सरकारी योजनाओं की पहुंच तथा प्रशासनिक जवाबदेही बेहतर बनाने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर जिलाधिकारी उदिता सिंह के इन निर्देशों से नालंदा में त्योहारों के दौरान सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और विकास योजनाओं की निगरानी को लेकर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन निर्देशों को जमीन पर कितनी तत्परता और प्रभावी तरीके से लागू करते हैं।
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