नालंदा के 45 BRP कर्मियों का ₹34.27 लाख वेतन बकाया, विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल
प्रभावित कर्मियों ने Mahalwala International Educare Services LLP से भुगतान में देरी पर जवाब मांगा; विभागीय नोटिस, अधिकारियों की भूमिका और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग।

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद से जुड़े नालंदा जिले के 45 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) कर्मियों का ₹34,27,704.26 का बकाया वेतन भुगतान नहीं होने का मामला सामने आया है।
प्रभावित कर्मियों के अनुसार 24 अक्टूबर 2026 तक बकाया भुगतान के इंतजार में 572 दिन बीत चुके थे, लेकिन उन्हें अब तक उनकी मेहनत की कमाई नहीं मिल सकी है। इस मामले में संबंधित कंपनी Mahalwala International Educare Services LLP के साथ-साथ विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
कर्मियों का कहना है कि उन्होंने अपने कार्य संबंधी दायित्वों का निर्वहन किया, लेकिन वेतन के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत और विभागीय पत्राचार के बावजूद भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इससे प्रभावित कर्मियों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विभागीय नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं होने पर सवाल
प्रभावित BRP कर्मियों के पास उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, संबंधित संस्था को भुगतान के संबंध में 7 मार्च, 10 मार्च, 19 मार्च, 20 मार्च और 25 मार्च 2025 को नोटिस अथवा निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद बकाया वेतन का भुगतान नहीं होने की बात कही जा रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब भुगतान को लेकर विभागीय स्तर पर पत्राचार और नोटिस जारी किए गए थे, तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई? क्या संबंधित कंपनी से जवाब मांगा गया और भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए कोई समयबद्ध कदम उठाया गया? प्रभावित कर्मियों ने इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद और संबंधित DEO की भूमिका की जांच की मांग
कर्मियों ने बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, नालंदा तथा संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि कई बार अपनी समस्या अधिकारियों के समक्ष रखने के बावजूद उन्हें बकाया वेतन दिलाने के लिए प्रभावी समाधान नहीं मिल सका।
कर्मियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर जारी पत्रों, नोटिसों और उनके बाद की गई कार्रवाई की समीक्षा होनी चाहिए। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या कर्तव्य निर्वहन में चूक सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
श्री कृष्ण दास की कथित भूमिका की भी जांच की मांग
प्रभावित कर्मियों ने श्री कृष्ण दास की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कर्मियों की ओर से संबंधित कंपनी के साथ कथित सहयोग और वेतन भुगतान के मामले में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। कर्मियों की मांग है कि संबंधित पत्राचार, निर्णयों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि भुगतान में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है। जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
कंपनी से जवाबदेही तय करने की मांग
कर्मियों के अनुसार बकाया भुगतान से जुड़ी संस्था Mahalwala International Educare Services LLP है। प्रभावित कर्मियों ने कंपनी से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि 45 BRP कर्मियों का वेतन लंबे समय से लंबित क्यों है और भुगतान कब तक किया जाएगा।
कर्मियों का कहना है कि संबंधित कंपनी तथा विभागीय अधिकारियों को इस मामले में अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उपलब्ध अभिलेखों की जांच के आधार पर बकाया राशि, भुगतान की स्थिति और देरी के कारणों का सत्यापन भी आवश्यक है।
वेतन नहीं मिलने से परिवारों पर आर्थिक दबाव
बकाया वेतन का मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। प्रभावित कर्मियों के अनुसार, वेतन नहीं मिलने के कारण घर का खर्च चलाने, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में परेशानी हो रही है। कई कर्मियों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मियों का कहना है कि वे किसी अतिरिक्त लाभ की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने काम के बदले मिलने वाली वैध बकाया राशि चाहते हैं। उनका मानना है कि लंबे समय तक भुगतान लंबित रहना गंभीर चिंता का विषय है और इसका जल्द समाधान होना चाहिए।
आठ सूत्री मांगों के साथ समयबद्ध कार्रवाई की अपील
प्रभावित 45 BRP कर्मियों ने मांग की है कि उनका कुल ₹34,27,704.26 का बकाया वेतन शीघ्र भुगतान कराया जाए। साथ ही संबंधित कंपनी से आधिकारिक जवाब मांगा जाए, विभागीय नोटिसों के बाद हुई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, नालंदा तथा संबंधित DEO की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
कर्मियों ने श्री कृष्ण दास की कथित भूमिका की जांच, जिम्मेदार पक्षों की पहचान, संभावित लापरवाही या अनियमितता पर नियमानुसार कार्रवाई तथा भुगतान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की भी मांग की है।
प्रभावित कर्मियों का कहना है कि उनके पास कर्मचारीवार बकाया राशि की सूची, विभागीय नोटिसों की प्रतियां और अन्य संबंधित पत्राचार उपलब्ध हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग और कंपनी इस मामले में क्या जवाब देते हैं तथा 45 BRP कर्मियों को उनका बकाया वेतन दिलाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।






