इस्लामपुर में सुरक्षित बचपन अभियान, बाल विवाह और बाल शोषण पर जागरूकता शिविर
नेताजी सुभाष +2 उच्च विद्यालय में नालसा के निर्देशन में आयोजित शिविर में विद्यार्थियों को बाल अधिकार, पॉक्सो कानून और निःशुल्क कानूनी सहायता की दी गई जानकारी।

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। बच्चों को बाल विवाह, बाल शोषण और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने तथा उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इस्लामपुर में विशेष विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया। इसके तहत नगर परिषद क्षेत्र स्थित नेताजी सुभाष +2 उच्च विद्यालय में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निर्देश पर ‘सुरक्षित बचपन’ अभियान के अंतर्गत जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि बाल विवाह और बच्चों के साथ किसी भी तरह का शोषण कानूनन अपराध है तथा ऐसी घटनाओं के खिलाफ शिकायत करने के लिए कानूनी सहायता उपलब्ध है।
यह कार्यक्रम नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के जिला जज सह अध्यक्ष सुशांत कुमार एवं न्यायाधीश सह सचिव राजेश कुमार गौरव तथा हिलसा अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति के एडीजे प्रथम सह अध्यक्ष आलोक कुमार पाण्डेय और अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी सह सचिव कुमारी सावित्री के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
शिविर में पैनल अधिवक्ता विजय कुमार और हिलसा अनुमंडलीय विधिक सहायता केंद्र एवं खुदागंज थाना में प्रतिनियुक्त पारा विधिक स्वयंसेवक (पीएलवी) आलोक कुमार ने विद्यार्थियों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
बाल विवाह कराने पर हो सकती है जेल और जुर्माने की सजा
परिचय सत्र में पीएलवी आलोक कुमार ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के गठन और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नालसा का गठन वर्ष 1987 में हुआ था और यह 9 नवंबर 1995 से देशभर में प्रभावी हुआ। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करना है।
वहीं, पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने बताया कि नालसा के निर्देशन में सुरक्षित बचपन अभियान 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रथम चरण के रूप में संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देना, बाल विवाह एवं बाल शोषण जैसी घटनाओं की रोकथाम करना और आम लोगों में कानूनी जागरूकता बढ़ाना है।
उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या उसे बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
पॉक्सो कानून बच्चों को देता है यौन अपराधों से सुरक्षा
शिविर में बाल शोषण के विभिन्न स्वरूपों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विद्यार्थियों को बताया गया कि बच्चों के साथ शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक या यौन दुर्व्यवहार करना तथा उनका अनुचित लाभ उठाना बाल शोषण की श्रेणी में आता है।
वक्ताओं ने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन उत्पीड़न, यौन हमला और अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत जरूरतमंद एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास की कानूनी व्यवस्था की गई है।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।
मुसीबत में बच्चे इन हेल्पलाइन नंबरों पर मांग सकते हैं मदद
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी तरह की परेशानी, शोषण या बाल अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में चुप रहने के बजाय किसी विश्वसनीय वयस्क, शिक्षक, पुलिस अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी अथवा जिला एवं अनुमंडल विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क करना चाहिए।
इस दौरान महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। इनमें चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन पुलिस सहायता 112, साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नालसा की निःशुल्क विधिक सहायता हेल्पलाइन 15100 शामिल हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील कुमार ने विद्यार्थियों से अनुशासन का पालन करने, नियमित रूप से विद्यालय आने और आपसी सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर सहायक शिक्षक लीना चन्द्र बरकर, उदय शंकर सिन्हा, माया गोविन्द, बविता पासवान, अमरेश कुमार रतनेश, सुबोध कुमार, संजीव, रविशंकर श्रीवास्तव, पुरुषोत्तम कुमार सिंह, ब्रजेश कुमार (नोडल), पिंकी कुमारी, सुमन कुमारी, सोनी कुमारी, पूजा कुमारी, ब्यूटी कुमारी, अर्चना कुमारी, ज्ञान मंजुषा भारती, विकास कुमार रंजन, रविश चन्द्र शर्मा सहित अन्य शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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