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पीएम आवास में वार्ड पार्षद की कमीशनखोरी की जांच करेगी डीएम की टीम

हिलसा (नालंदा दर्पण)। प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित कमीशनखोरी का मामला हिलसा नगर परिषद क्षेत्र में अब गंभीर मोड़ ले चुका है। वार्ड संख्या–10 में एक गरीब लाभुक से 30 हजार रुपये कमीशन मांगने और राशि नहीं देने पर निर्माण कार्य रुकवाने के आरोप ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है, जिसमें अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) और जिला विकास शाखा के एक अधिकारी को शामिल किया गया है। टीम को दो दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

मामला वार्ड संख्या-10 की लाभुक सुमंता देवी से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वार्ड पार्षद शैलेन्द्र कुमार उर्फ शैलू सिंह ने पीएम आवास निर्माण के बदले 30 हजार रुपये की मांग की।

आरोप है कि जब उन्होंने पैसे देने से इन्कार किया, तो दबाव बनाकर निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। इस घटना के बाद से लाभुक और उनका परिवार भय व असुरक्षा के माहौल में झोपड़ी में रहने को मजबूर है।

जांच के बीच वार्ड की बदहाली का मुद्दा भी सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत दलित टोला में तीन मोटर लगे होने के बावजूद करीब 60 घरों में पिछले 20 दिनों से नल-जल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। मजबूरी में लोग एकमात्र चापाकल से पानी लाने को विवश हैं।

नगर परिषद के ईओ रविशंकर कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं नल-जल योजना में गड़बड़ी की शिकायत पर संबंधित कर्मियों को जांच का निर्देश दिया गया है।

इस बीच मामला राजनीतिक रंग भी पकड़ता जा रहा है। माले की चार सदस्यीय टीम ने लाभुक से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और 6 तारीख को विरोध प्रदर्शन का एलान किया है। हालांकि अब तक कोई भी स्थानीय अधिकारी निर्माण स्थल पर भौतिक जांच के लिए नहीं पहुंचा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

लाभुक सुमंता देवी और उनके पति योगेंद्र मांझी अपने आरोपों पर अडिग हैं। उनका कहना है कि आवास निर्माण की सारी सामग्री उन्होंने खुद खरीदी है और भुगतान भी कर दिया है। केवल दुकानदार के तीन हजार रुपये बकाया हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षद खुद को बचाने के लिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

आरोप सामने आने के बाद वार्ड पार्षद के बयान लगातार बदलते रहे हैं। पहले उन्होंने सड़क पर रखी निर्माण सामग्री हटवाने की बात कही। फिर लाभुक पर शराब बेचने जैसे आरोप लगाए। बाद में एक अन्य वीडियो जारी कर दावा किया कि उन्होंने कमीशन नहीं मांगा, बल्कि उधार ली गई सामग्री की राशि की मांग की थी। बार-बार बदलते बयानों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

अब सबकी नजरें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या गरीब लाभुक को न्याय मिलेगा या फिर मामला फाइलों में उलझकर रह जाएगा।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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