बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। Big cyber crime: इस्लामपुर बाजार क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर अपनी करतूतों से लोगों को हैरान कर दिया है। इस बार उनका निशाना बने हैं एटीएम मशीनें, जिनके जरिए अपराधियों ने क्लोनिंग डिवाइस का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को डर में डाल दिया है, बल्कि बैंकों और एटीएम सेवाओं पर भरोसे को भी गहरा आघात पहुंचाया है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार अपराधी सुनसान और असुरक्षित एटीएम मशीनों को निशाना बनाते हैं। वे इन मशीनों में एक खास तरह का क्लोनिंग डिवाइस (स्किमर) लगाते हैं, जो ग्राहकों के एटीएम कार्ड का पूरा डेटा चुरा लेता है। जैसे ही कोई ग्राहक अपने कार्ड का इस्तेमाल करता है, उसका डेटा डिवाइस में सेव हो जाता है।
इसके बाद अपराधी इस डेटा को खाली एटीएम कार्ड पर कॉपी कर फर्जी कार्ड तैयार करते हैं और फिर उसका इस्तेमाल कर खातों से पैसे निकाल लेते हैं। इस तरह की ठगी इतनी चतुराई से की जाती है कि पीड़ित को इसका पता तब तक नहीं चलता, जब तक उनके खाते से बड़ी राशि गायब न हो जाए।
इस्लामपुर की रहने वाली अंजू देवी इस साइबर ठगी का शिकार हुईं। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक स्थानीय एटीएम से महज दो हजार रुपये निकाले थे, लेकिन उनके खाते से एक झटके में साढ़े दस हजार रुपये कट गए।
अंजू देवी ने बताया कि मैंने सिर्फ दो हजार रुपये निकाले थे, लेकिन जब मैंने अपने खाते की जांच की, तो पता चला कि मेरे खाते से अतिरिक्त राशि गायब है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा झटका था। अंजू देवी अकेली नहीं हैं। इस्लामपुर और आसपास के इलाकों में कई अन्य ग्राहकों ने भी अपने खातों से संदिग्ध कटौती की शिकायत की है।
एसबीआई की स्थानीय शाखा के प्रबंधक जितेंद्र सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि हमें कई ग्राहकों से शिकायत मिली है कि उनके खातों से पैसे निकालने के तुरंत बाद अतिरिक्त राशि कट रही है। इसकी जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार और थाना प्रभारी अनिल कुमार पाण्डेय को दे दी है। बैंक ने अपने परिसर में ग्राहकों को चेतावनी नोटिस भी जारी किया है, जिसमें असुरक्षित एटीएम का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है।
हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक और पुलिस दोनों ही इस मामले में स्पष्ट जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यह तकनीकी मामला है और इसकी जांच के लिए साइबर सेल की मदद ली जाएगी, जबकि बैंक का कहना है कि ग्राहकों को सावधानी बरतनी चाहिए। इस असमंजस की स्थिति में पीड़ित ग्राहक इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
इस्लामपुर बाजार क्षेत्र में कई एटीएम मशीनें ऐसी हैं, जहां न तो सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था है और न ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इस तरह की लापरवाही ने साइबर अपराधियों को अपराध करने का खुला मौका दे दिया है।
इस घटना के बाद बैंक और स्थानीय प्रशासन ने ग्राहकों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
सुनसान एटीएम का इस्तेमाल न करें: हमेशा भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मौजूद एटीएम का उपयोग करें।
कार्ड स्लॉट की जांच करें: एटीएम में कार्ड डालने से पहले स्लॉट को ध्यान से देखें। अगर कुछ असामान्य या अतिरिक्त डिवाइस नजर आए, तो उस एटीएम का उपयोग न करें।
ट्रांजेक्शन अलर्ट चालू रखें: अपने बैंक खाते पर एसएमएस अलर्ट सुविधा चालू रखें, ताकि हर ट्रांजेक्शन की जानकारी तुरंत मिल सके।
शिकायत तुरंत दर्ज करें: अगर खाते से संदिग्ध कटौती हो, तो तुरंत बैंक और स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
यह घटना न केवल इस्लामपुर, बल्कि पूरे नालंदा जिले के लिए एक चेतावनी है। साइबर अपराधियों के बढ़ते हौसले और तकनीकी दक्षता को देखते हुए बैंकों और प्रशासन को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकों को सभी एटीएम में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था अनिवार्य करनी चाहिए। साथ ही, ग्राहकों को जागरूक करने के लिए नियमित अभियान चलाए जाने चाहिए।





