
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण डेस्क)। नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ की सड़कों पर रोजाना जाम से जूझने वाले हजारों लोग पिछले तीन साल से एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर भरावपर फ्लाईओवर कब खुलेगा? राष्ट्रीय स्मार्ट सिटी मिशन की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बन रहा यह 1.5 किलोमीटर लंबा और 8.9 मीटर चौड़ा टू-लेन फ्लाईओवर अब तक पांच बार तय डेडलाइन चूक चुका है। अब छठी डेडलाइन 15 दिसंबर 2025 तय की गई है और शहरवासी उम्मीद के साथ-साथ थोड़ी बेचैनी भी लिए इस तारीख का इंतजार कर रहे हैं।
याद कीजिए कि यह कहानी साल 2022 में शुरू हुई थी। तब दशहरा 2024 तक फ्लाईओवर पूरा करने का वादा किया गया था। दशहरा आया और चला गया। फिर नई डेडलाइन जनवरी 2025 रखी गई। जनवरी भी बीत गई। इसके बाद दशहरा 2025 का नया लक्ष्य तय हुआ, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो सका।
दीपावली 2025 तक काम खत्म करने का आश्वासन दिया गया। मगर दिवाली की रौशनी तो शहर में जगमगा उठी। फ्लाईओवर अब भी अधर में लटका रहा। अब 15 दिसंबर 2025 की तारीख सामने है। पांच बार धोखा खा चुके शहरवासी अब सवाल पूछने से ज्यादा थक चुके हैं।
हालांकि अच्छी खबर यह है कि अब निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। बिहारशरीफ स्मार्ट सिटी के एमडी सह नगर आयुक्त दीपक कुमार मिश्रा ने ‘नालंदा दर्पण’ को बताया कि 90 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। 57 स्लैब में से 52 स्लैब डाल दिए गए हैं, 171 गार्डर में से सभी गार्डर लगा दिए गए हैं।
1600 मीटर लंबाई में से 900 मीटर तक सड़क का कालीकरण (ब्लैक टॉपिंग) पूरा हो चुका है, बाकी 700 मीटर पर तेजी से काम चल रहा है। शुरुआती अड़चनें चाहे स्थानीय लोगों का विरोध हो या तकनीकी दिक्कतें अब दूर हो चुकी हैं। अगर मौसम ने साथ दिया तो 15 दिसंबर तक फ्लाईओवर यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
लगभग 80 करोड़ रुपये की यह परियोजना शहर के सबसे व्यस्त इलाके रांची रोड स्थित एलआईसी भवन से शुरू होकर भरावपर चौराहा, लहेरी थाना चौराहा होते हुए सोगरा कॉलेज के समीप तक जाएगी। इसके चालू होने के बाद शहर के इन तीन सबसे जाम-प्रवण चौराहों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, यात्रा का समय आधा हो जाएगा और आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी। रात में फ्लाईओवर पर लगने वाली आधुनिक एलईडी लाइटें इसे न सिर्फ सुरक्षित बनाएंगी बल्कि शहर को एक नया नजारा भी देंगी।
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत फ्लाईओवर के साथ-साथ शहर में स्मार्ट सिग्नल सिस्टम, स्मार्ट पोल, नई पार्किंग व्यवस्था और बेहतर स्ट्रीट लाइट नेटवर्क भी तैयार हो रहा है। इन सबको मिलाकर बिहारशरीफ न सिर्फ नालंदा जिले बल्कि पूरे बिहार के शहरी बुनियादी ढांचे में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
अब सवाल सिर्फ एक है कि क्या इस बार 15 दिसंबर सचमुच आखिरी डेडलाइन साबित होगी? शहर की सांसें थामी हुई हैं। क्योंकि छठी बार भी अगर वादा टूटा तो लोग सिर्फ निराश ही नहीं होंगे, गुस्सा भी करेंगे। फिलहाल तो सभी की निगाहें उस दिन पर टिकी हैं जब भरावपर फ्लाईओवर पर पहला वाहन दौड़ेगा और बिहारशरीफ की सड़कों पर जाम की लंबी कतारें इतिहास बन जाएंगी।





