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बौद्ध सर्किट फोरलेन: पुराने रेट पर मुआवजा से किसानों में पनापा आक्रोश

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बौद्ध सर्किट फोरलेन सड़क परियोजना, जो बिहार के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा कर रही है, अब स्थानीय किसानों के लिए एक बड़ा दर्द बन गई है। सालेपुर-राजगीर भाया नूरसराय और अहियापुर को जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण तो हो रहा है, लेकिन मुआवजे की राशि ऐसी कि किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

सिलाव प्रखंड के ग्राम माधोपुर, थाना नंबर 403 की जमीनों का मुआवजा 110 वर्ष पुराने ‘धनहर’ श्रेणी के आधार पर तय किया गया है, जबकि आज यह जमीन व्यावसायिक श्रेणी में आ चुकी है। किसानों ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की है और जिलाधिकारी को एक अनुरोध पत्र सौंपा है, जिसमें मुआवजे को वर्तमान बाजार दर पर देने की मांग की गई है।

यह कहानी सिर्फ मुआवजे की नहीं, बल्कि एक पूरे गांव की आजीविका की है। माधोपुर गांव नालंदा जिले के दिल में बसा है और अब विकास की राह पर खड़ा है, लेकिन किसानों का कहना है कि यह विकास उनकी कीमत पर हो रहा है। गांव की जमीनें निर्माणाधीन नूरसराय-सिलाव पथ सिलाव से नहरपर होते हुए नेपुरा-जंघारों-अकौना-वेन पथ, पर्यटक स्थल रुक्मिणी स्थान पथ और नालंदा खुला विश्वविद्यालय इस्लामपुर-नालंदा पथ से घिरी हुई हैं।

इन सड़कों के कारण माधोपुर की जमीन अब आवासीय और व्यावसायिक दोनों श्रेणियों में तब्दील हो चुकी है। यहां जमीन की खरीद-बिक्री भी इन्हीं ऊंची दरों पर हो रही है, लेकिन भू-अर्जन विभाग द्वारा जारी नोटिस (एवार्ड) में पुरानी खतियान एंट्री का हवाला देकर ‘धनहर’ श्रेणी का जिक्र किया गया है। किसानों का कहना है कि 115 साल पुरानी खतियान पर आधारित मुआवजा देना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। हमारी जमीन अब शहर की तरह व्यावसायिक हो गई है। यहां होटल, दुकानें और आवास बन रहे हैं। सरकार हमें क्यों पुराने जमाने में धकेल रही है?

हालांकि इस मुद्दे की जड़ें गहरी हैं। बौद्ध सर्किट फोरलेन परियोजना राजगीर, नालंदा और बोधगया जैसे ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने का सपना देख रही है। यह पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह किसानों के लिए एक चुनौती बन गई है।

किसानों ने बैठक कर बताया कि एवार्ड में अंकित मुआवजा राशि आज से पांच साल पहले की दरों से भी कम है। उन्होंने जिलाधिकारी को सौंपे पत्र में हाल ही की जमीन खरीद-बिक्री के बसिका (दस्तावेज) संलग्न किए हैं, जो साबित करते हैं कि माधोपुर में जमीन की कीमतें व्यावसायिक स्तर पर पहुंच चुकी हैं। किसानों ने भावुक होकर कहा कि हमारे गांव के पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ सड़कें बन रही हैं। सारी जमीन किसानों की ली जा रही है। हम भूमिहीन हो जाएंगे और ऊपर से इतना कम मुआवजा? यह हमारे परिवारों को बर्बाद कर देगा।

किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने की कगार पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मुआवजे की राशि नहीं बढ़ाई गई तो वे सड़क पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनके लिए यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल है। सरकार विकास करे, लेकिन किसानों को नजरअंदाज न करे। स्थानीय प्रशासन से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जिलाधिकारी कार्यालय इस अनुरोध पर विचार कर रहा है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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