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बिहारशरीफ बाजार समिति के घूसखोर कार्यालय सहायक को एक साल की जेल

नालंदा दर्पण डेस्क। पटना निगरानी विभाग की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की बिहारशरीफ बाजार समिति कार्यालय, रामचंद्रपुर के तत्कालीन सहायक भूपेंद्र प्रसाद सिंह को एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भूपेंद्र को दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया।

विशेष लोक अभियोजक प्रभारी निगरानी ट्रैप, किशोर कुमार सिंह ने बताया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे अतिरिक्त एक माह की कारावास की सजा भुगतनी होगी। यह मामला 13 मई 2009 का है, जब निगरानी ब्यूरो के अधिकारियों ने भूपेंद्र प्रसाद सिंह को एक किसान से उसके धान की बिक्री के लिए चेक जारी करने के बदले 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

यह घटना उस समय की है, जब बिहारशरीफ के रामचंद्रपुर बाजार समिति कार्यालय में कार्यरत भूपेंद्र प्रसाद सिंह ने एक किसान से उसके धान की बिक्री के लिए चेक जारी करने के लिए रिश्वत की मांग की थी। निगरानी विभाग को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद एक सुनियोजित जाल बिछाया गया। 13 मई 2009 को निगरानी ब्यूरो की टीम ने भूपेंद्र को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही धर दबोचा। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का संदेश दिया था।

विशेष अदालत में इस मामले की लंबी सुनवाई चली, जिसमें निगरानी विभाग ने ठोस सबूत और गवाह पेश किए। विशेष लोक अभियोजक किशोर कुमार सिंह ने बताया कि भूपेंद्र प्रसाद सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत पर्याप्त सबूत थे, जिसके आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया। अदालत ने न केवल एक वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई, बल्कि 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, ताकि भविष्य में इस तरह के कृत्यों के लिए एक नजीर स्थापित हो।

इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की एक और बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों में निगरानी विभाग की सक्रियता और विशेष अदालतों के कड़े रवैये से यह स्पष्ट है कि रिश्वतखोरी जैसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय किसानों और आम लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि यह छोटे किसानों के साथ होने वाले शोषण के खिलाफ एक मजबूत कदम है।

बिहारशरीफ जैसे क्षेत्रों में जहां किसान अपनी मेहनत की कमाई के लिए बाजार समितियों पर निर्भर रहते हैं, इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर करते हैं। निगरानी विभाग की यह कार्रवाई न केवल दोषी को सजा दिलाने में सफल रही, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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