राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी राजगीर प्राचीन गर्म झरने और शांत वनवासी पहाड़ियां पर्यटकों को लुभाती हैं, वहां आज विकास की चमक फीकी पड़ रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धरोहर के लिए जाना जाने वाला यह शहर अब खराब निर्माण गुणवत्ता की वजह से सुर्खियों में है।
हाल ही में शुरू हुए एक फव्वारे के निर्माण कार्य की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जो शहर की सड़कों पर ‘बहते’ कंक्रीट का दर्दनाक चित्रण कर रही हैं। निर्माण के महज कुछ दिनों में ही यह संरचना धंसने लगी है, जिससे स्थानीय निवासियों में आक्रोश फैल गया है। क्या यह महज लापरवाही है या भ्रष्टाचार का गहरा षड्यंत्र? नालंदा दर्पण की पड़ताल में सामने आया है कि राजगीर नगर परिषद का पूरा तंत्र ही इस मामले में घिरा हुआ प्रतीत हो रहा है।
दृश्य को देखिए तो मन खटक जाता है। राजगीर की व्यस्त सड़क पर जहां एक ओर हरे-भरे पेड़ और पहाड़ी परिदृश्य शहर की सुंदरता बिखेरते हैं, वहीं दूसरी ओर आधा-अधूरा फव्वारा निर्माण स्थल बह रहा है। वायरल तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि कंक्रीट की दीवारें पहले ही लहराने लगी हैं, जबकि ईंटों के ढेर और पेवर ब्लॉक्स बिखरे पड़े हैं। एक तरफ लाल-पीले रंग की पेविंग स्टोन्स सजी हुई हैं तो दूसरी तरफ निर्माण का कंकाल धूल और मिट्टी में लिपटा नजर आता है।
बैकग्राउंड में पुरानी दीवारें और लोहे की जालीदार फेंसिंग शहर के ऐतिहासिक स्वरूप को दर्शाती हैं, लेकिन सामने का दृश्य विकास की विडंबना उजागर कर रहा है। एक स्थानीय निवासी ने नालंदा दर्पण को बताया कि यह फव्वारा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बनाया जा रहा था, लेकिन देखिए बारिश की पहली बूंदों में ही यह ‘बह’ गया। नगर परिषद ने टेंडर तो दे दिया, लेकिन ठेकेदार ने घटिया माल इस्तेमाल किया। हमारी सड़कें पहले से ही जर्जर हैं, अब यह क्या?
यह मामला राजगीर नगर परिषद द्वारा हाल ही में शुरू किए गए विशेष परियोजना का हिस्सा है। परिषद के अधिकारियों के अनुसार यह फव्वारा सर्कुलर पार्क के बीच में बनाया जा रहा है, जो पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्पॉट साबित होने वाला था। लेकिन निर्माण की शुरुआत के साथ ही गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर सैकड़ों यूजर्स ने तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें #RajgirConstructionFail और #BiharCorruption जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा है कि राजगीर की सड़कें इतनी खराब कि बाइक चलाते हुए लगता है जैसे समुद्र में लहरें सवार हो गईं! वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कैसे मजदूरों ने आनन-फानन में काम चढ़ाया, लेकिन बिना ठोस फाउंडेशन के ही ऊपरी संरचना पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी की जांच न करने और घटिया सीमेंट-रेत के अनुपात से ऐसा होना लाजमी था।
नालंदा जिले में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। पिछले साल भी राजगीर-पटना मार्ग पर बनी नई सड़क मानसून में ही उखड़ गई थी, जिसकी वजह से यातायात ठप हो गया। स्थानीय विधायक ने सदन में मामला उठाया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब इस वायरल घटना ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक बार फिर यह मामला जांच के दायरे में है। स्थानीय लोगों का विश्वास डगमगा चुका है। परिषद का पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा है। टेंडर कमीशन पर बिकते हैं और गरीब जनता को मिलता है टूटा-फूटा निर्माण। अगर ऐसे ही चला तो पर्यटन नगरी की साख दांव पर लग जाएगी। राजगीर जैसे शहर जो कालचक्र महोत्सव और बौद्ध सर्किट का केंद्र है, वहां ऐसे मामलों से बचाने की जरूरत है। जिला प्रशासन इसकी उच्च स्तरीय जांच करे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। अन्यथा विकास की यह ‘लहर’ शहर को बहा ले जाएगी।





