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नालंदा विश्वविद्यालय कमल सागर के तट पर ‘बगुलों का सम्मेलन’ देख लोग दंग

नालंदा दर्पण डेस्क। अहले सुबह करीब सवा छह बजे का वक्त था। नालंदा विश्वविद्यालय के ठीक पीछे स्थित कमल सागर के किनारे वाला छोटा-सा शांत जलाशय कभी किसी का ध्यान नहीं खींचता था। लेकिन सुबह-सुबह प्रकृति ने वहाँ ऐसा दृश्य रचा कि जो भी गुजरा, वह रुक गया। मोबाइल निकाला और हैरान होकर तस्वीरें खींचने लगा।

जलाशय के दक्षिणी किनारे पर लगभग 80-90 सफेद बगुले (कैटल एग्रेट) एकदम सैनिकों की तरह कतारबद्ध होकर बैठे थे। हर बगुला दूसरे से बिल्कुल बराबर दूरी पर। सभी का मुंह एक ही दिशा में पूरब की ओर। गर्दन एक समान ऊंचाई पर पंख पूरी तरह समेटे हुए। दूर से देखने पर लग रहा था कि मानो किसी ने सफेद रंग की मोतियों की एक लंबी माला पानी के किनारे बिछा दी हो। हवा का एक रुख भी नहीं था, पानी बिल्कुल सपाट। बगुलों की परछाई भी पानी में उसी परफेक्ट ज्योमेट्री के साथ दिख रही थी।

People were stunned to see the Heron Conference on the banks of Kamal Sagar Nalanda University 2
People were stunned to see the ‘Heron Conference’ on the banks of Kamal Sagar, Nalanda University.

सुबह की सैर कर रहे पंकज कुमार बताते हैं कि वे पिछले पंद्रह साल से रोज यहीं टहलता हूं, लेकिन ऐसा कभी नहीं देखा। लगा जैसे बगुले कोई मौन व्रत कर रहे हों या सुबह की ध्यान-साधना में लीन हों। एक भी बगुला हिला तक नहीं। करीब घंटा भर पूरा दृश्य ऐसे ही रहा।

पक्षी प्रेमी विशेषज्ञ बताते हैं कि यह सामान्य प्रवासी व्यवहार नहीं है। कैटल एग्रेट आमतौर पर झुंड में रहते हैं, लेकिन इतनी परफेक्ट ग्रिड में, बिना हिले-डुले, इतनी देर तक बैठना, यह दुर्लभ है। शायद ठंड के कारण ये एनर्जी बचाने के लिए ऐसा कर रहे थे या कोई सामूहिक संकेत था।

हालांकि नवंबर-दिसंबर में उत्तर से आने वाले कई प्रवासी पक्षी राजगीर के जलाशयों में विश्राम करते हैं। बगुले सामाजिक प्राणी हैं और कभी-कभी बेहद अनुशासित व्यवहार दिखाते हैं, लेकिन आज का यह दृश्य वाकई असाधारण है। यह प्रकृति की उस रहस्यमयी सुंदरता का प्रमाण है, जो हम रोज देखते हैं। फिर भी कभी-कभी अचानक हैरान कर जाती है।

कमल सागर का जलाशय का ऐसा सुबह कुछ पल के लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत कॉन्फ्रेंस हॉल नजर आ रहा था। जहां बोलने वाला कोई नहीं था, सुनने वाले सब थे और इस संदेश के साथ कि प्रकृति अभी भी हमसे बहुत आगे है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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