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PMAY में धांधलीः अमीरों को लाभ, गरीब वंचित, देख लीजिए हालत !

प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के लिए एक सपने के समान है, लेकिन बेन प्रखंड में यह सपना अब रिश्वत और फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ता दिख रहा है। ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों को कानून के कठघरे में लाए, ताकि असली हकदारों को उनका अधिकार मिल सके...

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के नालंदा जिले के बेन प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में भारी अनियमितता की परतें खुलती जा रही हैं। सरकारी कागजों पर गरीबों के लिए बनाए गए मकान, हकीकत में कहीं दिखाई नहीं दे रहे। वहीं दूसरी ओर जिनके पास पहले से ही पक्का मकान है, उन्हें लाभ मिल रहा है- बस शर्त इतनी है कि जेबें भरनी चाहिए। कमोवेश सभी प्रखंडों में समान नजारा दिख रहा है।

बेन प्रखंड के सौरे गांव निवासी टुन्नी प्रसाद ने खुलासा किया कि ज़रूरतमंदों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा। उनके अनुसार पहले रिश्वत दीजिए, तभी योजना में नाम जुड़ता है। जिन लोगों ने पैसे नहीं दिए, उनका नाम सूची से गायब है।

कागजों पर बन गया ‘घर’, ज़मीन पर नहीं एक भी ईंटः बेन पंचायत के नथाचक गांव में कई लाभुकों के नाम पर आवास स्वीकृत किए गए, लेकिन धरातल पर न तो निर्माण हुआ और न ही कोई काम शुरू। टुन्नी प्रसाद ने बताया कि छोटु कुमार, ममता देवी, पूजा देवी और सुनीता देवी के नाम पर आवास स्वीकृत हुए थे, लेकिन बिना निर्माण कार्य के ही राशि का बंदरबांट कर लिया गया।

अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत का आरोपः बारा, मैंजरा, अकौना, नोहसा सहित कई गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि आवास सहायक, वार्ड सदस्य और प्रखंड के अधिकारियों के बीच गहरी साठगांठ है। इस गठजोड़ का परिणाम ये है कि असली हकदारों को योजना से वंचित कर दिया जाता है।

नाम जोड़ने के लिए मांगे जा रहे 20-30 हजार रुपएः ग्रामीणों का कहना है कि दलाल घर-घर घूमकर नाम जोड़ने के एवज में 20 से 30 हजार रुपये की मांग करते हैं। पैसे नहीं देने पर धमकी दी जाती है कि नाम सूची से हटा दिया जाएगा। सूर्यदेव प्रसाद, मालती देवी, सुखिया देवी और मंगली देवी ने बताया कि कई गरीब सिर्फ इस वजह से योजना से बाहर हो गए क्योंकि वे घूस देने में सक्षम नहीं थे।

जिन्होंने खुद से मकान बनाया, उन्हें नहीं मिली सहायताः नथाचक गांव की गुलाबी देवी और सरीता देवी ने बिना सरकारी सहायता के मकान तो बना लिया, लेकिन अब कार्यालय के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें राशि नहीं दी जा रही। अंत में थक-हार कर उन्होंने लोक निवारण कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।

प्रशासन की कार्रवाई का इंतजारः इस पूरे मामले पर बेन प्रखंड के बीडीओ श्री हर्ष ने कहा कि जिन लोगों ने राशि लेकर मकान नहीं बनाया है, उनके खिलाफ नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के लिए एक सपने के समान है, लेकिन बेन प्रखंड में यह सपना अब रिश्वत और फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ता दिख रहा है। ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों को कानून के कठघरे में लाए, ताकि असली हकदारों को उनका अधिकार मिल सके।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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