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    Sunday, July 21, 2024
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      घोसरावाँ माँ आशापूरी मंदिरः ज्ञान की धरती पर अज्ञानता की प्रतीक !

      पुजारी की जानकारी की मानें तो इस इलाके में आशापूरी माँ स्वयं प्रकट हुई थी और जिस स्थान पर प्रकट हुई, वहीं पर मंदिर का निर्माण करवाया गया..

      बिहार शरीफ (नालंदा दर्पण डेस्क)। एक ओर हमारा समाज माँ देवी की अराधना करते हैं वहीं, दूसरी ओर इन्हीं महिलाओं को मंदिर में जाने से रोका भी जाता है। यह प्रथा आदि काल से ही चली आ रही है। इस प्रथा को स्वयं भगवान ने धरती पर आकर नहीं बनाया बल्कि हमारे समाज में बैठे समाजिक ठेकेदार हैं जो इस तरह की प्रथा लागू करते है।

      GHOSRAWAN TEMPLE NALANDA 1नालंदा जिले के गिरियक प्रखंड में एक ऐसा गांव है, जहां हर साल नवरात्र के समय गांव के अंदर बने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर मंदिर के पुजारियों द्वारा पूर्ण रूप से वर्जित करा दिया जाता है।

      नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से महज 15 किलोमीटर दूर गिरियक प्रखंड के घोसरावां गांव में नवरात्र के समय पूरे दस दिनों तक इस मंदिर में महिलाओं को अंदर प्रवेश करने पर पावंदी लगा दी जाती है।

      इस मंदिर का नाम आशापुरी रखा गया है, क्योंकि यहां बौद्ध काल में 18 सौ बौद्ध भिक्षु आकर अपनी मन्नत मांगते थे और उनकी मन्नतें भी पूरी होती थी। तब से लेकर आज तक यहां जो कोई भी भक्त नवरात्र के समय सच्चे मन से माँ आशापुरी की भक्ति करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

      मंदिर के पुजारी के अनुसार नवरात्र के समय इस मंदिर में महिलाओं का प्रतिपदा से लेकर दस दिनों तक विजया दशवीं की आरती के पहले तक मंदिर में पूर्ण रूप से प्रवेश वर्जित रहता है, क्योंकि यह इलाका पूर्व से ही तांत्रिक का गढ़ माना गया है।GHOSRAWAN TEMPLE NALANDA 3

      यहां तांत्रिक लोग सिद्धी प्राप्त करते थे। उसी समय से पूरे नवरात्र में यहां तांत्रिक पूजा यानी तंत्रियाण पूजा होती है और तंत्रियाण पूजा में महिलाओं के ऊपर पूर्ण रूप से प्रवेश निषेद्ध माना गया है। यह प्रथा अनादि काल से ही चला आ रहा है।

      पूर्वजों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण राजा घोष के द्वारा करवाया गया था। इसीलिए इस गांव का नाम घोसरावां पड़ा। पुजारी की जानकारी की मानें तो इस इलाके में आशापूरी माँ स्वयं प्रकट हुई थी और जिस स्थान पर प्रकट हुई, वहीं पर मंदिर का निर्माण करवाया गया।

      नवरात्र के समय इस घोसरावां मंदिर में बिहार के अलावे कोलकाता ओड़िसा मध्यप्रदेश आसाम दिल्ली झारखंड जैसे दूरदराज इलाको से आकर यहां दस दिनों पूजा पाठ करते है। जिससे उनकी मनचाहा मनोकामना पूरी होती है।

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