धरोहर
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150 वर्ष पुराना पंकज पोखर उपेक्षित: 32 एकड़ से सिमटकर 20 एकड़ रह गया ऐतिहासिक तालाब
बेन प्रखंड मुख्यालय का 150 वर्ष पुराना पंकज पोखर आज उपेक्षा का शिकार है। कभी 32 एकड़ में फैला यह ऐतिहासिक तालाब अब सिकुड़कर 20 एकड़ रह गया है। जलसंचयन के अभाव में तालाब सूखा पड़ा है, जिससे सिंचाई, पशु-पक्षियों और ग्रामीण जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।
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हिलसा के सपूत राम शरण सिंह : स्वतंत्रता संग्राम से सामाजिक उत्थान तक एक अमर गाथा
हिलसा (नालंदा दर्पण / मुकेश भारतीय)। भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कहानी केवल बड़े शहरों, चर्चित नेताओं और राजधानी के गलियारों तक सीमित नहीं है। इस संघर्ष की असली ताकत देश के गांवों, कस्बों और छोटे इलाकों से निकले उन गुमनाम नायकों में छिपी है, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के अपना सर्वस्व…
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इस्लामपुर के अमर योद्धा डॉ. चांद बाबू और जैन साहब की प्रेरणादायी गाथा
नालंदा दर्पण डेस्क / मुकेश भारतीय। नालंदा की धरती ने सिर्फ विश्वविद्यालय ही नहीं, बल्कि ऐसे योद्धा भी दिए जिन्होंने बिना किसी लालच के देश और समाज की सेवा की। कल इस्लामपुर नगर में जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती के अवसर पर निकली प्रभात फेरी और आयोजित संकल्प सभा ने…
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बोधगया बौद्ध महोत्सव में WORLD PEACE की अद्भुत सैंड आर्ट, मधुरेन्द्र ने बनाया यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्ड
नालंदा दर्पण डेस्क / मुकेश भारतीय। ज्ञान, करुणा और मोक्ष की पावन भूमि एक बार फिर विश्व शांति (WORLD PEACE) के विराट संदेश की साक्षी बनी, जब कालचक्र मैदान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बोधगया बौद्ध महोत्सव के दौरान रेत के कण-कण से भगवान बुद्ध की जीवंत उपस्थिति उकेरी गई। यह दृश्य केवल…
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नालंदा विश्वविद्यालय से जुड़े 52 ऐतिहासिक सरोवरों के पुराने दिन लौटेंगे !
राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल के सख्त निर्देशों के बाद प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से जुड़े 52 ऐतिहासिक तालाबों और सरोवरों पर की गई कथित अवैध जमाबंदी के रद्द होने की उम्मीद एक बार फिर प्रबल हुई है। यदि विभागीय आदेशों का जमीनी स्तर…
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उपेक्षा की मार झेलता अजातशत्रु स्तूप, धूमिल होती मगध की अमूल्य धरोहर
राजगीर (नालंदा दर्पण)। बौद्ध इतिहास और प्राचीन भारतीय सभ्यता की गौरवगाथा अपने भीतर समेटे ऐतिहासिक अजातशत्रु स्तूप आज घोर विभागीय उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। मगध सम्राट अजातशत्रु की राजधानी रहे राजगीर में स्थित यह स्तूप उनके अस्थि कलश पर निर्मित बताया जाता है, जिसे बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत…
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आज भी चुप हैं नालंदा विश्वविद्यालय की ऐसी अनकही कहानियां!
नालंदा दर्पण डेस्क। कल्पना कीजिए कि एक ऐसा नालंदा विश्वविद्यालय जहां सुबह से रात तक नौ सौ कमरों में ज्ञान की ज्योति जलती रहती थी। जहां दूर-दूर से आए विद्वान चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर हर्षवर्धन तक के राजाओं के संरक्षण में बौद्ध दर्शन, चिकित्सा, गणित और ज्योतिष की गहराइयों में उतरते…
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प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के दानदायी गांवों की खोज अभियान ठप
राजगीर (नालंदा दर्पण संवाददाता)। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का संचालन करीब 200 गांवों के सहयोग से होता था। इसका उल्लेख चीनी यात्री इ-त्सिंग ने अपने यात्रा-वृत्तांत में विस्तार से किया है। उनके अनुसार राज्य की ओर से ये गांव विश्वविद्यालय को दानस्वरूप प्राप्त हुये थे। उनसे आय, अनाज, श्रम व संसाधन उपलब्ध…
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महाभारत का से जुड़ा जरासंध अखाड़ा को लेकर पर्यटक चिंतित
राजगीर (नालंदा दर्पण)। धरती की मनोरम गोद में मगध के शक्तिशाली सम्राट जरासंध और पांडव वीर भीम के बीच 18 दिनों तक जहां अथाह शक्ति का मलयुद्ध चला। भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति में रचित यह महाभारत की अमर कथा आज भी राजगीर के हृदय में धड़क रही है। जरासंध अखाड़ा के नाम…









