राजगीर (नालंदा दर्पण)। पांच पहाड़ियों की गोद में बसा, पांच सरिताओं से सराबोर और कभी पांच राजाओं की राजधानी रहा राजगीर इन दिनों हीरो एशिया कप हॉकी महोत्सव का जश्न मनाने को आतुर है। ऐतिहासिक, पौराणिक, प्राकृतिक, आध्यात्मिक और पर्यटन की दृष्टि से यह देश-दुनिया में विशेष महत्व रखता है।
कभी मगध साम्राज्य की राजधानी रहे इस नगर ने भगवान बुद्ध और तीर्थंकर महावीर की साधना स्थली के रूप में अमिट छाप छोड़ी है। प्राकृतिक सौंदर्य की यह भूमि अब खेलों के महाकुंभ की मेजबानी करने को तैयार है।
29 अगस्त से 7 सितंबर तक राजगीर के अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हीरो एशिया कप हॉकी का भव्य आयोजन होगा। यह वह यादगार सफर है, जिसे इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज किया जाएगा। प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी राजगीर शहर उत्सव की शक्ल ले चुका है।
सड़कों और चौक-चौराहों पर आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी की जगमगाहट और पारंपरिक स्वागत द्वार यह संदेश दे रहे हैं कि राजगीर सिर्फ अध्यात्म और संस्कृति का गढ़ नहीं, बल्कि खेलों की नयी राजधानी भी बन रहा है।
एशिया के आठ देशों की टीमें जब हॉकी स्टेडियम के मैदान पर उतरेंगी, तो हर गोल, हर पास और हर जीत में हजारों दिलों की धड़कनें शामिल होंगी। खिलाड़ी अपने-अपने देशों को जीत दिलाने के लिए मैदान पर पसीना बहाएंगे। यह नजारा न केवल खेल प्रेमियों के लिए रोमांचक होगा, बल्कि बिहार की धरती पर एक नया इतिहास भी रचेगा।
उद्घाटन समारोह अपने आप में अविस्मरणीय होगा। बिहार की लोक कलाओं की झलकियां और परंपराएं विदेशी मेहमानों को अपनी जीवंत संस्कृति से परिचित कराएंगी। साथ ही आधुनिक नृत्य और संगीत के संगम से पूरा वातावरण उत्सवमय हो जाएगा। दर्शकों के लिए यह अनुभव केवल खेल का नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा के अद्भुत मिलन का होगा।
राजगीर की मेजबानी से पर्यटन, अध्यात्म और व्यापार को नई उड़ान मिलेगी। हजारों पर्यटक और खेल प्रेमी यहां आएंगे, जिससे स्थानीय होटल, परिवहन और बाजार गुलजार हो उठेंगे। युवाओं में खेल के प्रति नया उत्साह जगेगा। यह आयोजन आने वाले वर्षों में और बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट का मार्ग प्रशस्त करेगा।
बहरहाल, हीरो एशिया कप सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि बिहार की नई पहचान का उत्सव है। जब राजगीर की धरती पर हॉकी की गूंज उठेगी, तो दुनिया देखेगी कि यह प्राचीन नगरी किस तरह आधुनिक सपनों को गले लगा रही है। यह आयोजन राजगीर को न केवल खेलों के नक्शे पर स्थापित करेगा, बल्कि इसे वैश्विक पर्यटन और संस्कृति के केंद्र के रूप में भी नई पहचान देगा।





