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जरा देखिए CM नीतीश कुमार के हरनौत हाई स्कूल की हालत !

अधूरी इमारत, जलमग्न परिसर और ठप पढ़ाई...

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के मुख्यमंत्री (CM) नीतीश कुमार के हरनौत हाई स्कूल कभी नालंदा जिले के शैक्षणिक गौरव का प्रतीक रहा है। लेकिन आज वह बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है। दिसंबर 2023 में इस स्कूल के मल्टीपरपस बिल्डिंग के निर्माण कार्य का शिलान्यास बड़े जोश-खरोश के साथ किया गया था।

उस समय दावा किया गया था कि एक वर्ष के भीतर यह आधुनिक इमारत तैयार हो जाएगी, जो स्कूल के 1200 से अधिक छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल प्रदान करेगी। लेकिन डेढ़ साल बाद भी निर्माण कार्य आधा-अधूरा पड़ा है और हाल की बारिश ने स्कूल परिसर को तालाब में तब्दील कर दिया है। क्या यह सरकारी उदासीनता का नमूना है, या फिर ठेकेदारी प्रणाली की नाकामी?

पिछले दिनों से लगातार हो रही बारिश ने स्कूल की स्थिति को और दयनीय बना दिया है। पुराने भवनों के कार्यालय और कक्षाओं में पानी भर गया है, जिससे पठन-पाठन का कार्य पूरी तरह बाधित हो गया है।

प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार ने बताया, “स्कूल में लगभग 12 सौ छात्र नामांकित हैं। लेकिन कक्षाओं की कमी और जलजमाव के कारण पढ़ाई रैंडमली संचालित करनी पड़ रही है। अब तो बारिश के पानी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

छात्रों और शिक्षकों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिसर के निचले स्तर पर होने के कारण आसपास के मोहल्लों का पानी स्कूल में जमा हो जाता है। एक छात्र राहुल कुमार ने निराशा जताते हुए कहा कि हमारी कक्षाएँ कभी छत के नीचे तो कभी खुले में चलती हैं। बारिश में स्कूल पहुँचना मुश्किल हो जाता है।

निर्माण कार्य की धीमी गति ने स्थानीय समुदाय और स्कूल प्रशासन के धैर्य की परीक्षा ले ली है। प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि निर्माण एजेंसी की लापरवाही की शिकायत वरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से की गई है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि एजेंसी के जिम्मेदार लोग हमारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे। यहाँ तक कि बारिश से बचाव के लिए बनाए गए नए भवन के डिज़ाइन में भी खामियाँ हैं।

कई अभिभावक ने गुस्सा जताते हुए कहा कि हमारे बच्चों का भविष्य दाँव पर है। सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। क्या हमारे बच्चों को ऐसी हालत में पढ़ाई करनी पड़ेगी?

दरअसल हरनौत हाई स्कूल की स्थिति न केवल एक स्थानीय समस्या है, बल्कि यह बिहार के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढाँचे की बदहाली को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन, समयबद्ध लक्ष्य और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई इस तरह की समस्याओं को हल कर सकती है।

स्थानीय जनप्रतिनिधि ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, जबकि जिला शिक्षा विभाग का कहना है कि वे मामले की जाँच कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि जाँच और आश्वासनों से कब तक काम चलेगा? क्या सरकार और प्रशासन इस स्कूल के 1200 छात्रों के भविष्य को गंभीरता से लेंगे?

क्योंकि हरनौत हाई स्कूल की यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है? क्या यह केवल एक स्कूल की कहानी है या फिर पूरे सिस्टम की खामियों का नमूना?

नालंदा दर्पण अपने सुधी पाठकों से अपील करता है कि वे इस मुद्दे पर अपनी राय साझा करें और स्थानीय प्रशासन से जवाबदेही की माँग करें। आखिर शिक्षा का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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