मसौढ़ी ‘डॉग बाबू’ कांड: राजस्व अधिकारी सस्पेंड, आईटी सहायक वर्खास्त, 4 पर FIR

नालंदा दर्पण डेस्क। पटना जिले के मसौढ़ी अंचल कार्यालय में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ ‘डॉग बाबू’ के नाम से निवास प्रमाण-पत्र जारी करने का प्रकरण प्रकाश आने के मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) मसौढ़ी को त्वरित जाँच के लिए निर्देशित किया गया था और अब जाँच रिपोर्ट सामने आ चुकी है।
जाँच के दौरान यह खुलासा हुआ कि दिल्ली की एक महिला के आधार कार्ड का उपयोग करते हुए मसौढ़ी अंचल कार्यालय में निवास प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया गया था। हैरानी की बात यह है कि आवेदन में प्रस्तुत दस्तावेज़ों की जाँच बिना किसी गहन पड़ताल के स्वीकार कर ली गई।
इस प्रक्रिया में शामिल राजस्व अधिकारी ने गलत साक्ष्यों के आधार पर प्रमाण-पत्र जारी कर दिया, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। इस मामले में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
जाँच के बाद स्थानीय थाने में आवेदक, संबंधित राजस्व अधिकारी और आईटी सहायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। राजस्व अधिकारी, जिन्होंने बिना विस्तृत जाँच के प्रमाण-पत्र जारी किया, उन्हें निलंबित करने की सिफारिश राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजी गई है। इसके अलावा आईटी सहायक, जिसने बिना समुचित जाँच के आवेदन को स्वीकृति के लिए अग्रसारित किया, उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया गया है।
आवेदक पर भी गंभीर आरोप हैं। जाँच में पाया गया कि उसने नियमों के खिलाफ शपथ-पत्र देकर और किसी अन्य व्यक्ति के पहचान पत्र का दुरुपयोग करके गलत साक्ष्य प्रस्तुत किए। इस संबंध में पुलिस अनुसंधान जारी है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डॉग बाबू कांड ने मसौढ़ी के स्थानीय निवासियों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय निवासी राज कुमार ने नालंदा दर्पण से बातचीत में कहा कि ऐसे मामले आम जनता का भरोसा तोड़ते हैं। अगर निवास प्रमाण-पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ इतनी आसानी से गलत तरीके से जारी हो सकते हैं, तो हम प्रशासन पर कैसे भरोसा करें?
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता शालिनी प्रसाद ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बताते हुए माँग की है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन प्रणाली को और सख्त किया जाए। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ों की जाँच के लिए एक स्वचालित और पारदर्शी तंत्र की आवश्यकता है, ताकि ऐसी गलतियाँ दोबारा न हों।
इस प्रकरण ने न केवल मसौढ़ी अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूरे राज्य में निवास प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज़ों के सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएँगे। इनमें डिजिटल सत्यापन प्रणाली को अपग्रेड करना, कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
बहरहाल, मसौढ़ी ‘डॉग बाबू’ कांड एक चेतावनी है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लापरवाही और भ्रष्टाचार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। नालंदा दर्पण अपने पाठकों को इस मामले पर निरंतर अपडेट देता रहेगा।









