बेन (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के बेन क्षेत्र में इन दिनों सड़कों पर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि गांव की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक किशोर बेखौफ होकर विभिन्न प्रकार के वाहन सरपट दौड़ाते नजर आ रहे हैं। यह केवल बाइक या कार तक सीमित नहीं है, बल्कि कई नाबालिग टोटो, ऑटो, ट्रैक्टर और स्थानीय परिवहन साधनों को भी चलाते देखे जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार खासकर ईंट, बालू और मिट्टी ढोने वाले ट्रैक्टरों को चलाने में नाबालिगों की संख्या काफी अधिक है। कम उम्र और अनुभवहीनता के कारण ऐसे चालक सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ये किशोर तेज गति से वाहन चलाते हुए गांवों और घनी आबादी वाले इलाकों से भी बिना गति कम किए गुजर जाते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
परिवहन नियमों की खुली अनदेखीः बेन क्षेत्र में नाबालिग चालकों की बढ़ती संख्या परिवहन विभाग के नियमों की खुलेआम अवहेलना को दर्शाती है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को मोटर वाहन चलाने की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके यहां किशोर बिना लाइसेंस और सुरक्षा उपकरणों के सड़कों पर वाहन दौड़ाते दिखाई देते हैं।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति यह है कि कई युवक बिना हेलमेट के तेज गति से बाइक चलाते हैं, जबकि कई जगहों पर ट्रिपल या चार लोगों के साथ बाइक चलाते हुए भी देखा जाता है। ऐसे में सड़क सुरक्षा नियमों की पूरी तरह अनदेखी हो रही है।
कार्रवाई के अभाव में बढ़े हौसलेः स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण नाबालिग चालकों के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं। यदि समय रहते प्रशासन और परिवहन विभाग सख्ती नहीं करता है तो भविष्य में गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार लोगों ने इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया, लेकिन अब तक कोई ठोस अभियान या नियमित जांच नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सवालों के घेरे में अभिभावकों की भूमिकाः विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे अभिभावकों की लापरवाही भी बड़ी वजह है। कई अभिभावक खुद अपने किशोर बच्चों को बाइक या अन्य वाहन चलाने के लिए दे देते हैं।
जबकि मोटर वाहन अधिनियम के तहत यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके अभिभावक या वाहन मालिक पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद लोग इस नियम को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी सख्तीः सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नियमित जांच अभियान चलाना आवश्यक है। स्कूलों और पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर नाबालिगों और अभिभावकों को नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए।
यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो बेन क्षेत्र में नाबालिग चालकों की लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। समाचार स्रोतः नालंदा दर्पण/रामावतार कुमार
