शिक्षा विभाग में तबादलों की बाढ़, 85 फीसदी शिक्षकों ने दूरी को बनाया स्पेशल ग्राउंड

बिहार शिक्षा विभाग के इस कदम से जहां शिक्षकों को राहत मिल सकती है, वहीं यह प्रक्रिया सरकार के लिए शिक्षकों की तैनाती को संतुलित करने की चुनौती भी साबित हो सकती है

बिहार शरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग में सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए स्पेशल ग्राउंड पर आवेदन की प्रक्रिया जोर-शोर से चल रही है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 33,227 शिक्षकों ने तबादले के लिए आवेदन किया है। इनमें से 85% से अधिक यानी 27,661 शिक्षकों ने अपने वर्तमान पदस्थापन से पसंदीदा स्थान की दूरी को आधार बनाकर तबादले की मांग की है।

बता दें कि सरकारी शिक्षकों के तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 दिसंबर से ई-शिक्षा कोश पोर्टल पर शुरू हुई है और यह 15 दिसंबर तक चलेगी। गाइडलाइंस के अनुसार शिक्षक सात विशेष कारणों के आधार पर स्थानांतरण का अनुरोध कर सकते हैं। इनमें गंभीर बीमारियां, दिव्यांगता, मानसिक स्वास्थ्य, वैवाहिक स्थिति और दूरी प्रमुख हैं।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शिक्षकों का तबादले का सबसे बड़ा आधार उनके कार्यस्थल और घर या पसंदीदा स्थान के बीच की दूरी है। कुल आवेदनों में 85% से अधिक शिक्षक इसी वजह से तबादले की मांग कर रहे हैं।

राज्य में कुल 5,45,182 सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं। अब तक केवल 6% शिक्षकों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। जबकि विभाग को उम्मीद है कि अंतिम तिथि तक यह संख्या और बढ़ सकती है।

शिक्षा विभाग ने आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए ई-शिक्षा कोश पोर्टल का इस्तेमाल किया है। विभाग का कहना है कि गाइडलाइंस के तहत निर्धारित सात वजहों पर ही स्थानांतरण के लिए विचार किया जाएगा।

शिक्षाविदों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों के लिए दूरी एक बड़ी समस्या है। खासकर तब जब उनके परिवार शहरी या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। हालांकि तबादलों के इस चलन से कुछ क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी का संकट गहराने की संभावना है।

15 दिसंबर को आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने तक और अधिक शिक्षक अपनी समस्याओं के आधार पर तबादले का अनुरोध कर सकते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी आवेदन पर विचार करने के बाद ही स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे।

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