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नगरनौसा में मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा, CMO और PMO से जांच कार्रवाई की मांग

नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। नगरनौसा प्रखंड की रामपुर पंचायत के लोदीपुर गांव स्थित वार्ड संख्या-6 में चल रही नाली-गली एवं जल निकासी योजना को लेकर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीण स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच मनरेगा के तहत दर्ज मजदूरों की उपस्थिति और उनके भुगतान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत में कहा गया है कि पंचायत में करीब 250 मजदूर मनरेगा के तहत सूचीबद्ध हैं और उनके नाम पर नियमित मजदूरी भुगतान किया जाता रहा है। दावा है कि इनमें से कई मजदूर वास्तविक रूप से काम करते नजर नहीं आते। कुछ लोगों को मामूली राशि देकर उनके हस्ताक्षर अथवा अंगूठे का निशान लिया जाता है और सरकारी भुगतान की शेष राशि की कथित रूप से निकासी कर ली जाती है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि दर्जनों ऐसे लोगों के नाम मनरेगा मजदूरों की सूची में शामिल हैं, जो कथित तौर पर योजना के लिए निर्धारित पात्रता के दायरे में नहीं आते। दूसरी ओर पंचायत के जरूरतमंद लोगों को मनरेगा के काम से वंचित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

योजना की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल

लोदीपुर के वार्ड संख्या-6 में जारी नाली-गली एवं जल निकासी योजना को लेकर भी स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि योजना से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है और सरकारी राशि के उपयोग की समुचित निगरानी नहीं की जा रही है। मामले को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों, बिचौलियों तथा संबंधित विभागीय कर्मियों की मिलीभगत की शिकायत की गई है।

अन्य पंचायतों में भी जांच की मांग

शिकायत में यह भी कहा गया है कि ऐसी स्थिति केवल रामपुर पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि नगरनौसा प्रखंड की अन्य पंचायतों में भी मनरेगा और पंचायत योजनाओं से संबंधित अनियमितताओं की जांच की आवश्यकता है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि प्रखंड की पंचायतों में मनरेगा भुगतान, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, मस्टर रोल, जॉब कार्ड और योजनाओं की स्थल जांच कराई जाए तो वित्तीय अनियमितताओं की भयावह तस्वीर सामने आ सकती है।

इस मामले में बिहार सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग और प्रशासन शिकायत में लगाए गए इस मामले जांच के लिए क्या कदम उठाते हैं। आधिकारिक जांच में मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान रिकॉर्ड, जॉब कार्ड तथा स्थल पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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