नालंदा DM का उर्वरक बिक्री पर सख्त निगरानी का आदेश, DAP की मांग

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में जिला उर्वरक निगरानी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हरदेव भवन में आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य जिले में उर्वरक वितरण और बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराना था।

बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी ने जानकारी दी कि वर्तमान में जिले में अधिकांश उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। लेकिन डीएपी (डाय अमोनियम फॉस्फेट) की आपूर्ति आवश्यकता के अनुसार 10,500 टन के मुकाबले सिर्फ 5,422 टन हुई है। इस पर जिलाधिकारी ने कृषि निदेशक बिहार को तुरंत पत्र प्रेषित कर डीएपी की मांग करने का निर्देश दिया।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उर्वरक बिक्री में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी उर्वरक प्रतिष्ठानों पर कृषि समन्वयक या किसान सलाहकार की उपस्थिति में ही भौतिक सत्यापन के बाद बिक्री की जाएगी।

बैठक में तय किया गया कि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी प्रतिदिन कम से कम एक प्रतिष्ठान और प्रखंड कृषि पदाधिकारी दो प्रतिष्ठानों की जांच करेंगे। वहीं जिला स्तरीय धावादल उर्वरक प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण और छापेमारी सुनिश्चित करेगा। उर्वरक की निर्धारित दर से ऊंचे दाम पर बिक्री पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

किसानों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए जिला स्तर पर एक उर्वरक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। जिसका दूरभाष नंबर-06112-23143 है। यह कक्ष प्रत्येक कार्य दिवस पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक सक्रिय रहेगा। शिकायतों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि TOP-40 और TOP-20 यूरिया खरीददारों की सूची की तत्काल जांच की जाए। यदि इन सूचीबद्ध बायर्स में कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

इस बैठक में उप विकास आयुक्त, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, सहायक निदेशक (पौधा संख्या, उद्यान और रसायन), मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं के प्रतिनिधि, थोक एवं खुदरा उर्वरक विक्रेता उपस्थित थे।

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