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नालंदा पुलिस की पंचरत्ना ने नेपाल में गोल्ड जीत दुनिया में लहराया तिरंगा

साउथ एशियन कॉम्बैट कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में 75 किग्रा भार वर्ग में ऐतिहासिक जीत, गणतंत्र दिवस पर नालंदा डीएम और एसपी ने किया सम्मानित

नालंदा दर्पण डेस्क / मुकेश भारतीय। नालंदा पुलिस में कार्यरत महिला सिपाही पंचरत्ना कुमारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाली यह जांबाज महिला सिपाही आज खेल के मैदान में भी भारत का परचम लहरा रही है।

नेपाल के लुंबिनी में आयोजित साउथ एशियन कॉम्बैट कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में पंचरत्ना कुमारी ने 75 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल बिहार पुलिस बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि की चर्चा आज गांव-गांव से लेकर पुलिस महकमे और खेल जगत तक हो रही है।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पंचरत्ना की ऐतिहासिक जीत

नेपाल के ऐतिहासिक और पवित्र नगर लुंबिनी में आयोजित यह प्रतियोगिता दक्षिण एशिया की सबसे प्रतिष्ठित कुश्ती प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान सहित कुल आठ देशों की महिला पहलवानों ने भाग लिया।

कठिन प्रतिस्पर्धा और उच्च स्तर के मुकाबलों के बीच पंचरत्ना कुमारी ने जिस आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया, उसने दर्शकों और निर्णायकों को समान रूप से प्रभावित किया। हर मुकाबले में उन्होंने अपने अनुभव, शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती का परिचय देते हुए प्रतिद्वंद्वियों को एक के बाद एक पराजित किया।

फाइनल मुकाबले में पंचरत्ना की निर्णायक जीत

75 किलोग्राम भार वर्ग में खेले गए मुकाबले अत्यंत रोमांचक रहे। शुरुआती दौर से ही पंचरत्ना ने आक्रामक रणनीति अपनाई और विपक्षी खिलाड़ियों को संभलने का मौका नहीं दिया। उनकी पकड़, संतुलन और दांव-पेंच इतने सटीक थे कि कई मुकाबले समय से पहले ही उनके पक्ष में समाप्त हो गए।

फाइनल मुकाबला सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण रहा, जहां एक मजबूत विदेशी पहलवान से उनका सामना हुआ, लेकिन निर्णायक क्षणों में पंचरत्ना ने अदम्य साहस और अनुशासन का परिचय देते हुए निर्णायक बढ़त बनाई और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

नेपाल सरकार के खेल मंत्री ने पंचरत्ना को पहनाया स्वर्ण पदक

समापन समारोह के दौरान नेपाल सरकार के खेल मंत्री माननीय संतोष पांडे ने पंचरत्ना कुमारी को स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर विभिन्न देशों के खेल पदाधिकारी, प्रशिक्षक, तकनीकी अधिकारी और खिलाड़ी उपस्थित रहे।

सभी ने भारतीय महिला खिलाड़ी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि पंचरत्ना ने न केवल एक प्रतियोगिता जीती है, बल्कि खेल भावना और महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश भी दिया है।

गणतंत्र दिवस पर नालंदा डीएम और एसपी ने पंचरत्ना को किया सम्मानित

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर यह सफलता हासिल करने के बाद पंचरत्ना कुमारी जब अपने कार्यस्थल नालंदा लौटीं तो पूरे पुलिस महकमे में गर्व और खुशी का माहौल देखने को मिला। गणतंत्र दिवस के अवसर पर नालंदा पुलिस लाइन में आयोजित समारोह में नालंदा एसपी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि पंचरत्ना जैसी खिलाड़ी पुलिस विभाग के लिए प्रेरणा हैं, जो ड्यूटी और खेल दोनों में संतुलन बनाकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

कठिन परिस्थितियों ने मजबूत बनायाः पंचरत्ना

अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए पंचरत्ना कुमारी ने सबसे पहले “जय हिंद” के साथ अपने विभाग और देश को नमन किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उनके परिवार, विभाग और उन सभी अधिकारियों की देन है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।

उन्होंने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से लगातार कुश्ती का अभ्यास कर रही हैं। उनकी खेल यात्रा आसान नहीं रही, लेकिन कठिन परिस्थितियों ने ही उन्हें और मजबूत बनाया।

पहले बीएमपी-5 पटना में पदस्थापित थीं पंचरत्ना

पंचरत्ना ने बताया कि वे पहले बीएमपी-5, पटना में पदस्थापित थीं, जहां से उन्होंने गंभीर रूप से अभ्यास शुरू किया। वहां से ट्रांसफर होकर नालंदा आने के बाद भी उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई। पुलिस ड्यूटी के दौरान समय निकालना आसान नहीं होता, लेकिन वरीय अधिकारियों के सहयोग और सकारात्मक माहौल के कारण वे अभ्यास जारी रख सकीं। उन्होंने तत्कालीन एसपी राजेश कुमार और वर्तमान डीएसपी (मुख्यालय) श्याम किशोर रंजन का विशेष रूप से आभार जताया और कहा कि अधिकारियों के प्रोत्साहन ने उन्हें आगे बढ़ने की ऊर्जा दी।

कराटे फेडरेशन ऑफ इंडिया से भी जुड़ी रही हैं पंचरत्ना

पंचरत्ना कुमारी केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। वे कराटे फेडरेशन ऑफ इंडिया से भी जुड़ी रही हैं और नेशनल लेवल पर कई पदक अपने नाम कर चुकी हैं। खेल के प्रति उनका समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाता है। वे मानती हैं कि खेल केवल शारीरिक क्षमता का नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और अनुशासन का भी इम्तिहान होता है।

मजदूर पिता की बेटी हैं पंचरत्ना

पंचरत्ना कुमारी की सफलता की कहानी और भी प्रेरणादायक तब बन जाती है, जब उनके पारिवारिक हालत पर नजर डाली जाए। वे ग्राम तियारा, पोस्ट मनोहरपुर, थाना राजपुर, जिला बक्सर (बिहार) की निवासी हैं। उनके पिता श्री राधेश्याम प्रसाद पेशे से मजदूर हैं, जबकि माता श्रीमती सरस्वती बौद्ध गृहिणी हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी उनकी राह में रुकावट नहीं डाली, बल्कि हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया।

ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी हैं पंचरत्ना

ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी पंचरत्ना ने बचपन से ही संघर्ष देखा, लेकिन उन्होंने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। खेत-खलिहान और गांव की पगडंडियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती मंच तक पहुंचना उनके मजबूत इरादों और अथक परिश्रम का प्रमाण है। वे कहती हैं कि उनकी सफलता उन सभी बेटियों के लिए संदेश है, जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।

बिहार के लिए गर्व की बातः डॉ. मनोज कुमार यादव

उनकी इस उपलब्धि पर समाज के विभिन्न वर्गों से बधाइयों का तांता लगा हुआ है। पूर्व जिला पार्षद डॉ. मनोज कुमार यादव ने कहा कि पंचरत्ना कुमारी ने अपनी मेहनत और अनुशासन से यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। यह सफलता न केवल बिहार पुलिस बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है और आने वाली पीढ़ियों को खेल एवं राष्ट्र सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

बिहार की बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं पंचरत्ना

वहीं चौसा नगर पंचायत की मुख्य पार्षद श्रीमती किरण देवी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि साधारण परिवार से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतना अत्यंत सराहनीय है। पंचरत्ना कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उनकी सफलता से जिले और राज्य की बेटियों को नई प्रेरणा और आत्मविश्वास मिलेगा।

बक्सर से लेकर नालंदा तक हो रही पंचरत्ना की चर्चा

आज पंचरत्ना कुमारी की यह उपलब्धि केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, समर्पण और देशभक्ति की जीवंत मिसाल बन चुकी है। बक्सर से लेकर नालंदा तक, गांव से लेकर पुलिस लाइन तक, हर जगह उनकी चर्चा हो रही है।

वर्दी में अनुशासन और अखाड़े में आक्रामकता का यह संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। पंचरत्ना कुमारी ने यह दिखा दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक बेटी अपने परिवार, समाज और देश के लिए इतिहास रच सकती है।

Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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