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हिलसा में एनआईए-एटीएस की दस्तक, हथियार तस्करी नेटवर्क पर बड़ा खुलासा, फिर सुर्खियों में चिकसौरा

“यहां लंबे समय से मिनी गन फैक्ट्रियां कुटीर उद्योग की तरह संचालित होती रही हैं। पिस्टल, रिवॉल्वर, राइफल, स्टेनगन और यहां तक कि पेन पिस्टल जैसे आधुनिक हथियारों के निर्माण की खबरें सामने आ चुकी हैं..

हिलसा (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के हिलसा और चिकसौरा क्षेत्र में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एटीएस) की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। हथियार तस्करी और संदिग्ध नेटवर्क के खिलाफ चलाए गए इस विशेष अभियान से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

सुबह चार बजे शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन करीब पांच घंटे तक चला। इस दौरान कई अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन और बैंकिंग से जुड़े साक्ष्य जब्त किए गए। सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई बिहारशरीफ के कुख्यात हथियार तस्कर मो. परवेज की हालिया गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सुरागों के आधार पर की गई।

जांच एजेंसियों को मोबाइल डेटा से पता चला कि अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल पेमेंट, बैंक खातों और सीएसपी केंद्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी सूचना के आधार पर टीम ने हिलसा शहर के राममूर्ति नगर, चिकसौरा थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव तथा चिकसौरा बाजार स्थित एक सीएसपी केंद्र पर एक साथ दबिश दी।

जांच में केशोचक गांव निवासी सत्येंद्र सिंह का नाम इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी के रूप में सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से अवैध हथियार तस्करी से जुड़े लोगों के संपर्क में था और लेन-देन के लिए डिजिटल माध्यम का उपयोग कर रहा था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक चिकसौरा बाजार के सीएसपी संचालक कुंदन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसियों को संदेह है कि इसी केंद्र के माध्यम से मो. परवेज तक रकम पहुंचाई जाती थी।

छापेमारी के दौरान जांच टीम ने सत्येंद्र सिंह के हिलसा स्थित आवास, उसके ससुराल मिर्जापुर गांव और कुंदन के सीएसपी केंद्र की बारीकी से तलाशी ली। पलंग, बक्से, अलमारी और गोदरेज तक खंगाले गए।

इस दौरान सत्येंद्र सिंह का आधार कार्ड, उसकी पत्नी की चेकबुक और एक मोबाइल फोन जब्त किया गया है। तकनीकी साक्ष्यों से यह भी संकेत मिले हैं कि गिरफ्तारी से बचने के लिए रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

फिलहाल सत्येंद्र सिंह फरार बताया जा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह पहले भी कई मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। वर्ष 2001 में पटना जिले के सिगरियावा थाना क्षेत्र में हथियार के साथ उसकी गिरफ्तारी हुई थी, जबकि 2009 में पटना-नालंदा सीमा के समीप चकमहदीपुर गांव के पास भी वह पुलिस के हत्थे चढ़ा था। एनआईए और एटीएस की टीम अब उसके अन्य सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

इस कार्रवाई के बाद चिकसौरा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। यह इलाका पिछले करीब पांच दशकों से अवैध हथियार निर्माण के लिए कुख्यात रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां लंबे समय तक मिनी गन फैक्ट्रियां कुटीर उद्योग की तरह संचालित होती रही हैं। पिस्टल, रिवॉल्वर, राइफल, स्टेनगन और यहां तक कि पेन पिस्टल जैसे आधुनिक हथियारों के निर्माण की घटनाएं पूर्व में कई बार सामने आ चुकी हैं।

हालांकि वर्ष 2012 में चिकसौरा थाना की स्थापना के बाद पुलिस कार्रवाई तेज हुई और अवैध निर्माण में कुछ कमी आई, लेकिन पूरी तरह इस नेटवर्क पर रोक नहीं लग सकी। आज भी हर साल एक-दो बार मिनी हथियार फैक्ट्री के पकड़े जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। ताजा छापेमारी ने एक बार फिर इस पुराने नेटवर्क की जड़ों को उजागर कर दिया है।

स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए नेटवर्क के आर्थिक और तकनीकी पहलुओं की गहन पड़ताल में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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