अब सभी सरकारी अस्पताल होंगे पेपरलेस, मरीजों को मिलेगा आभा पोर्टल से इलाज

स्वास्थ्य सेवा का डिजिटलीकरण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। यह मरीजों की सुविधा, गरिमा और समय की बचत से जुड़ा हुआ मुद्दा है। हर मरीज को आभा पोर्टल (ABHA- Ayushman Bharat Health Account) से जोड़ा जाना जरूरी है।

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अब नालंदा के मरीजों को इलाज के लिए बार-बार लाइन में खड़ा होकर पर्ची बनवाने या पुराने रिकॉर्ड ढूंढने की परेशानी नहीं झेलनी होगी। केंद्र सरकार की एक बड़ी पहल के तहत जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को जल्द ही पूरी तरह पेपरलेस बना दिया जाएगा। इसका उद्देश्य मरीजों को तेज, पारदर्शी और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।

इस योजना की प्रगति का जायजा लेने भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव सह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अराधना पटनायक और राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत नालंदा पहुंचे। अधिकारियों ने बिहारशरीफ स्थित मॉडल हॉस्पिटल के साथ दीपनगर, सिलाव और राजगीर के अस्पतालों का भी निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अराधना पटनायक ने स्पष्ट कहा कि हर मरीज को आभा पोर्टल (ABHA – Ayushman Bharat Health Account) से जोड़ा जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब हर मरीज का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड बनेगा, जिसे भारत के किसी भी सरकारी अस्पताल में आसानी से देखा जा सकेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता और समय दोनों में सुधार आएगा।

उन्होंने बताया कि जिन मरीजों के पास मोबाइल फोन नहीं है, उनसे किसी रिश्तेदार या परिचित का मोबाइल नंबर लेकर आभा कार्ड बनाया जाए। पर्ची केवल मरीज को देने के लिए होनी चाहिए, बाकी सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जानी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान दवा वितरण केंद्र भी अधिकारियों के विशेष ध्यान का केंद्र रहा। पटनायक ने स्वास्थ्यकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उन्हें दवा के कॉम्बिनेशन और विकल्पों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। यदि डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवा उपलब्ध नहीं है, तो मरीज को उपयुक्त विकल्प की दवा जरूर दी जाए ताकि कोई भी मरीज दवा के अभाव में अस्पताल से खाली हाथ न लौटे।

उन्होंने यह भी कहा कि दवाओं की एक्सपायरी डेट पर नजर रखना जरूरी है। पहले उन दवाओं का वितरण करें जिनकी मियाद कम बची है।

अपर सचिव अराधना पटनायक ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा का डिजिटलीकरण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, यह मरीजों की सुविधा, गरिमा और समय की बचत से जुड़ा हुआ मुद्दा है। हम चाहते हैं कि हर मरीज को सहज और सम्मानजनक सेवा मिले।

निरीक्षण के दौरान नालंदा के सिविल सर्जन डॉ. जितेन्द्र कुमार, डीपीएम श्याम कुमार निर्मल, स्वास्थ्य प्रबंधक मो. इमरान, लेखापाल सुरजीत कुमार समेत कई स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे। सभी ने अधिकारियों को अस्पतालों की मौजूदा स्थिति, मरीजों की संख्या, दवा उपलब्धता और तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

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