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कोर्ट के आदेश पर 17 साल बाद थरथरी थाना में दर्ज हुई चोरी की प्राथमिकी!

यह सिर्फ चोरी की घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित साजिश थी, जिसमें स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है। ग्रामीणों ने वर्षों तक न्याय पाने के लिए आवाज उठाई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार पीड़ित पक्ष ने...

हिलसा (नालंदा दर्पण)। चंडी थाना क्षेत्र के मुड़ला विगहा से अमरौरा बधार तक 2007 में चोरी हुई 11 केवीए की बिजली तार की घटना एक बार फिर चर्चाओं में है। करीब 17 वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ी यह फाइल अब न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद फिर से खुल गई है।

न्यायालय के आदेश के आलोक में थरथरी थाना में आखिरकार इस पुराने मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जिससे पुलिस हरकत में आ गई है और अब गंभीरता से जांच शुरू हो चुकी है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में अज्ञात चोरों ने रात के अंधेरे में लगभग एक किलोमीटर लंबी 11 केवीए बिजली तार को काटकर गायब कर दिया था। यह तार मुड़ला विगहा से अमरौरा बधार तक बिछाई गई थी, जो उस वक्त चंडी प्रखंड के कई ग्रामीण इलाकों को बिजली आपूर्ति करती थी।

उस समय बिजली विभाग में कनिष्ठ अभियंता चंद्रनाथ सामंतो पदस्थापित थे, लेकिन घटना के बाद विभागीय या पुलिस स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे मामला वर्षों तक फाइलों में धूल फांकता रहा।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ चोरी की घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित साजिश थी, जिसमें स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है।

ग्रामीणों ने वर्षों तक न्याय पाने के लिए आवाज उठाई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार पीड़ित पक्ष ने हाल ही में इस मामले को अदालत में परिवाद के रूप में प्रस्तुत किया, जहां से थरथरी थाना को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया।

थरथरी थाना प्रभारी उमाशंकर मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुराने रिकॉर्ड व फाइलों की गहनता से जांच की जा रही है। साथ ही बिजली विभाग से भी रिपोर्ट मांगी गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस मामले में संलिप्त लोगों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यह मामला सिर्फ तार चोरी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए होते, तो ना सिर्फ चोर पकड़े जा सकते थे, बल्कि ऐसे अपराधों पर अंकुश भी लगाया जा सकता था।

अब जब पुलिस ने आखिरकार इस पुराने मामले की जांच शुरू की है तो लोगों को एक बार फिर उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। सवाल यह है कि क्या 17 साल बाद भी न्याय मिल पाएगा? क्या दोषियों को सजा मिल सकेगी? या फिर यह मामला एक बार फिर सिस्टम की धूल में खो जाएगा?

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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