शराब तस्करी और हत्या के मामलों में बिहारशरीफ कोर्ट का कड़ा फैसला

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में अवैध शराब तस्करी और हत्या जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ बिहारशरीफ व्यवहार न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। दो अलग-अलग मामलों में कोर्ट ने कठोर सजा सुनाकर अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है। इन मामलों में एक मां-बेटे को शराब तस्करी के लिए पांच-पांच साल की सजा दी गई, जबकि संपत्ति विवाद में भाभी की हत्या के आरोपी भैंसुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
राजगीर थाना क्षेत्र के पिलखी गांव में अवैध शराब तस्करी के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश-13 सह उत्पाद मामलों के विशेष न्यायाधीश-2 अनूप सिंह ने शोभा देवी और उनके बेटे गोपाल राजवंशी को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
घटना 11 अप्रैल 2024 की सुबह की है, जब उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली कि पिलखी गांव में भारी मात्रा में चुलाई शराब रखी गई है। सहायक अवर निरीक्षक विजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गांव पहुंचकर शोभा देवी के घर की घेराबंदी की और छापेमारी की। इस दौरान दो कमरों से 590 लीटर चुलाई शराब और शराब बनाने की सामग्री बरामद की गई। मौके पर शोभा देवी को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि गोपाल राजवंशी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। बाद में 13 अप्रैल 2024 को उसे भी घर से गिरफ्तार कर लिया गया।
मामले में अभियोजन की ओर से स्पेशल पीपी दिनेश दास और उत्पाद विभाग की विशेष अधिवक्ता कौशिकी कुमारी ने पैरवी की। विचारण के दौरान पांच गवाहों की गवाही और जब्त शराब के सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया। यह सजा नालंदा में अवैध शराब के कारोबार पर नकेल कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दूसरे मामले में नूरसराय थाना क्षेत्र के छतरपुर गांव में संपत्ति बंटवारे के विवाद में हुई हत्या के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम संजीव कुमार सिंह ने आरोपी रामजनम यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसके न अदा करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में नामजद अन्य तीन अभियुक्तों रवि यादव, संजय यादव और जितेंद्र यादव को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
घटना 29 जनवरी 2023 की है, जब पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर रामजनम यादव और उसके भाइयों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि रामजनम ने संपत्ति का बड़ा हिस्सा अपने पास रखा था, जिसे लेकर अन्य भाई उसके घर के पास इकट्ठा हुए।
विवाद बढ़ने पर रामजनम छत पर चढ़कर ईंट-पत्थर चलाने लगा, जिससे कई लोग घायल हो गए। इसके बाद जितेंद्र यादव के उकसाने पर रामजनम ने गोली चला दी, जो उसके भाई रामदहिन यादव की पत्नी गिरिजा देवी को लगी। घायल गिरिजा को पहले सदर अस्पताल और फिर पीएमसीएच ले जाया गया, जहां 31 जनवरी 2023 को उनकी मृत्यु हो गई।
अभियोजन की ओर से सात गवाहों ने बयान दर्ज कराए। हालांकि, मृतका के पति रामदहिन यादव समेत चार परिजन गवाही से मुकर गए, लेकिन मृतका की बहू नेहा कुमारी ने घटना की पुष्टि की। डॉक्टर और अनुसंधानकर्ता के बयानों के आधार पर कोर्ट ने रामजनम यादव को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इन दोनों मामलों में कोर्ट के सख्त फैसलों से नालंदा जिले में अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संदेश गया है। शराब तस्करी और हिंसक अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन और न्यायालय की यह सक्रियता सराहनीय है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की सजा अपराधियों के लिए सबक साबित होगी और समाज में कानून के प्रति सम्मान बढ़ेगा।





