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सिंचाई योजना का अधूरा सफर: किसानों की उम्मीदें टूटी, सीएम से समाजसेवी की गुहार

चंडी (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के चंडी प्रखंड में दस्तुरपर गोखुलपुर पइन का जीर्णोद्धार कार्य लघु सिंचाई विभाग बिहार सरकार द्वारा पूर्ण घोषित किया गया है। वास्तव में किसानों के लिए एक अधूरी कहानी बनकर रह गया है। विभाग के फेसबुक पेज पर दावा किया गया है कि इस योजना से 94 हेक्टर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है।

स्थानीय किसान और समाजसेवी इस योजना में छूटे हुए कार्यों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की जा रही है कि अधूरे हिस्सों को पूरा करवाकर किसानों की मेहनत को पानी दिया जाए।

करोड़ों रुपये की लागत से शुरू हुई यह योजना मुहाने नदी के पानी को गांवों तक पहुंचाने का वादा करती है। विभाग का दावा है कि कार्य पूर्ण हो चुका है, लेकिन चंडी प्रखंड के निवासियों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण हिस्से अधर में लटके पड़े हैं। नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज के मुख्य द्वार से अमलतास के पेड़ तक खुदाई का कार्य बीच में ही छोड़ दिया गया। इससे सिंचाई की मुख्य लाइन प्रभावित हो रही है और पानी का प्रवाह बाधित है।

योजना के एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में पाकड़ के पेड़ के पास पुल का निर्माण होना था, जो मुहाने नदी के पानी को इस पार से उस पार जमुआर और केवाल खंधा तक पहुंचाने का माध्यम बनता। लेकिन पुल बिना बनाए ही विभाग ने हाथ खींच लिए। नतीजा? नदी का पानी गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पुल के यह योजना न केवल अपूर्ण है, बल्कि बाढ़ के समय गांवों में पानी भरने की समस्या को और बढ़ा सकती है। करोड़ों रुपये लगाने के बाद भी अगर पानी नहीं पहुंचेगा तो किसान को क्या फायदा? यह सवाल अब हर किसान की जुबान पर है।

इसी योजना में मोहन टिशन के पास पैन की खुदाई भी अधर में छोड़ दी गई। विभाग के अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि स्थानीय लोग बार-बार शिकायतें दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं। एक निवासी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि शिकायत लिखते-लिखते पेन की स्याही खत्म हो गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अब किस अधिकारी के पास जाएं? सब एक-दूसरे पर टाल देते हैं।

इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने वाले समाजसेवी उपेंद्र प्रसाद सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अपील की है। सिंह ने लिखा है कि इस योजना को विभाग द्वारा पूर्ण दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में कई कार्य छूटे हुए हैं। कृपया छूटे हुए हिस्सों को पूरा करवाएं, ताकि मुहाने नदी का पानी गांवों तक पहुंच सके और किसानों को वास्तविक लाभ मिले।

उपेंद्र प्रसाद सिंह लंबे समय से ग्रामीण विकास के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि ये कार्य पूरे नहीं हुए तो योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि यह न केवल सिंचाई की समस्या है, बल्कि किसानों की आजीविका से जुड़ा सवाल है, जहां सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से पहले ही वे जूझ रहे हैं।

नालंदा जिला ऐतिहासिक रूप से शिक्षा और कृषि का केंद्र रहा है। आज भी सिंचाई सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में लघु सिंचाई योजनाओं से लाखों हेक्टर भूमि को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में खामियां आम हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसी योजनाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जाए। ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अब सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री की ओर से इस अपील पर कोई कार्रवाई होगी? चंडी प्रखंड के किसान इंतजार में हैं कि कब उनके खेतों में पानी की धारा बहेगी और अधूरा सपना पूरा होगा। नालंदा दर्पण इस मुद्दे पर नजर रखे हुए है और आगे की अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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