खोज-खबरनालंदाबिग ब्रेकिंगबिहार शरीफभ्रष्टाचारशिक्षा

यूं फर्जीवाड़ा कर 5 साल तक इंटर की कॉपियां जांचता रहा हरनौत का यह शिक्षक

यह मामला शिक्षा प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जहां योग्य शिक्षक मूल्यांकन कार्य से वंचित रहते हैं, वहीं फर्जी तरीके से लोग अपने पदों का दुरुपयोग कर रहे हैं…

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार में शिक्षा व्यवस्था की खामियों का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हरनौत प्रखंड के श्री शंकर उच्च माध्यमिक विद्यालय अमरपुरी के प्रभारी प्रधानाध्यापक उमेश प्रसाद पिछले पांच वर्ष से पर फर्जी तरीके से इंटर परीक्षा की कॉपियों की जांच कर रहा है। यह मामला तब उजागर हुआ, जब स्कूल के शिक्षकों ने उनकी औपबंधिक नियुक्ति पत्र को देखा और उसमें भारी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ।

शिक्षकों ने इस संदिग्ध नियुक्ति की जानकारी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दी, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि उमेश प्रसाद की नियुक्ति शारीरिक शिक्षक के रूप में हुई थी। लेकिन उन्होंने बोर्ड के पोर्टल पर गलत सूचना देकर खुद को रसायन विज्ञान का परीक्षक दिखाया। नियमों के अनुसार शारीरिक शिक्षक को मूल्यांकन कार्य में नहीं लगाया जा सकता। फिर भी वे पिछले पांच वर्षों से इंटर परीक्षा की कॉपियां जांचता रहा।

दरअसल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा इंटरमीडिएट परीक्षा की कॉपी जांच के लिए परीक्षकों की सूची तैयार की जाती है। इसमें उन्हीं शिक्षकों को शामिल किया जाता है, जो संबंधित विषय में योग्य होते हैं। लेकिन उमेश प्रसाद ने बोर्ड के पोर्टल में फर्जी जानकारी भरकर अपना नाम रसायन विज्ञान के परीक्षक के रूप में जोड़ लिया। इस बार जब इंटर परीक्षा 2025 के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया की सूची जारी हुई, तो इसमें उनका नाम फिर से शामिल था।

इस तरह की लापरवाही से न केवल परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठते हैं, बल्कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। एक शारीरिक शिक्षक द्वारा रसायन विज्ञान की कॉपी जांचना बेहद गंभीर मामला है। क्योंकि यह सीधे तौर पर छात्रों के अंकों और उनके करियर को प्रभावित करता है।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का प्रमाण है। बोर्ड की डायरेक्टरी में उनका नाम मैट्रिक स्तर पर नहीं था। लेकिन इंटरमीडिएट की डायरेक्टरी में फर्जी तरीके से जोड़ा गया। इतना ही नहीं शिक्षा विभाग की मिलीभगत के कारण ही वे पांच साल से लगातार यह कार्य कर रहे थे।

हालांकि इस फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद शिक्षा विभाग ने उनके नियुक्ति पत्र को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही जांच अधिकारियों को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि उनकी संलिप्तता पूरी तरह साबित होती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

Admin

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Admin) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

शांति और ध्यान का अद्भुत अनुभव बोधगया वैशाली का विश्व शांति स्तूप विक्रमशिला विश्वविद्यालय के बहुरेंगे दिन राजगीर सोन भंडारः दुनिया का सबसे रहस्यमय गुफा