पटना मेट्रो का ट्रायल 2 सितंबर से शुरू, जानें डिटेल
नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार की राजधानी पटना में मेट्रो परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। आगामी 2 सितंबर से पटना मेट्रो का पहला ट्रायल शुरू होने जा रहा है। यह ट्रायल बैरिया स्थित पाटलिपुत्र अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल के सामने बने मेट्रो डिपो में होगा, जहां 132 केवी स्विच स्टेशन को सफलतापूर्वक चार्ज कर लिया गया है।
इसके साथ ही मेट्रो के ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह परियोजना न केवल पटना की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाएगी, बल्कि शहर के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी मील का पत्थर साबित होगी।
पटना मेट्रो कॉरपोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के अधिकारियों के अनुसार, 2 सितंबर से शुरू होने वाले ट्रायल में मेट्रो ट्रेन को डिपो के अंदर 800 मीटर लंबे ट्रैक पर दौड़ाया जाएगा।
इस दौरान ट्रेन की तकनीकी जांच की जाएगी और किसी भी तरह की गड़बड़ियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। अभी यह ट्रायल केवल डिपो के भीतर ही होगा और एलिवेटेड ट्रैक पर ट्रेन का परिचालन बाद में शुरू होगा।
इस ट्रायल के दौरान मेट्रो की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया मेट्रो के सुरक्षित और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पटना मेट्रो डिपो में बिजली आपूर्ति के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया गया है। डिपो में स्थापित रिसीविंग स्टेशन में चार पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 30 एमवीए है। इनमें से दो ट्रांसफॉर्मर 132 केवी की ट्रांसमिशन लाइन को 33 केवी में परिवर्तित करेंगे, जो विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर लगे डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर को बिजली आपूर्ति करेंगे। इन डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर से 440 वोल्ट की बिजली प्राप्त होगी, जो एयर कंडीशनर, एक्सलेटर, लिफ्ट और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों को संचालित करेगी।
वहीं शेष दो पावर ट्रांसफॉर्मर 132 केवी की लाइन को 25 केवी में बदलेंगे, जो मेट्रो ट्रेन के संचालन के लिए आवश्यक है। यह तकनीकी व्यवस्था न केवल मेट्रो के संचालन को सुगम बनाएगी, बल्कि ऊर्जा दक्षता को भी बढ़ाएगी।
पटना मेट्रो का पहला चरण मलाही पकड़ी से न्यू पाटलिपुत्र बस टर्मिनल तक लगभग 6.5 किलोमीटर के दायरे में शुरू होगा। इस कॉरिडोर में मलाही पकड़ी, भूतनाथ, जीरोमाइल और न्यू पाटलिपुत्र बस टर्मिनल स्टेशन शामिल हैं। खेमनीचक स्टेशन पर अभी स्लैब चढ़ाने का कार्य चल रहा है, जबकि अन्य स्टेशनों पर फिनिशिंग का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
पटना मेट्रो परियोजना के इस चरण के पूरा होने से शहर के प्रमुख इलाकों में यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को एक तेज, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन विकल्प मिलेगा।
पटना मेट्रो परियोजना न केवल एक परिवहन परियोजना है, बल्कि यह शहर के विकास की नई कहानी लिखने का माध्यम भी है। मेट्रो के शुरू होने से न केवल यातायात की भीड़भाड़ कम होगी, बल्कि व्यापार, रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मेट्रो के शुरू होने से उनकी दैनिक यात्रा आसान और समय की बचत करने वाली होगी।
पटना मेट्रो कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि मेट्रो का संचालन न केवल विश्वसनीय हो, बल्कि यह पटना के लोगों के लिए गर्व का विषय भी बने। 2 सितंबर का ट्रायल इस दिशा में एक बड़ा कदम है।
पटना मेट्रो परियोजना बिहार के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह परियोजना न केवल पटना को एक आधुनिक महानगर के रूप में स्थापित करेगी, बल्कि अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम करेगी। ट्रायल की सफलता के बाद मेट्रो का नियमित संचालन शुरू होने की उम्मीद है, जो पटना के लोगों के लिए एक नया युग लाएगा।





