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      देखिए वीडियो खुलासाः दोषी को छोड़ निर्दोष को कैसे फंसा रही है नालंदा पुलिस

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      नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के सीएम नीतीश कुमार दावा करते हैं कि उनकी सरकार में न किसी को बचाया जाता है और न किसी को फंसाया जाता है। उनकी जदयू पार्टी के करींदे भी मीडिया के सामने यहीं ढोल पीटते नहीं अघाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि पूरा सूबा तो छोड़िए, सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में हीं जदयू के बड़े घाघ नेता के ईशारे पर पुलिस नाच रही है और निर्दोष को फंसाने एवं दोषी को बचाने की खेल रही है।

      सबसे बड़ी शर्मनाक स्थिति तो यह है कि ऐसे घृणित खेल में थानेदार, डीएसपी से लेकर एसपी तक शामिल दिख रहे हैं, जिन पर कानून पालन का असल जबाबदेही है। क्योंकि सरकारें आती जाती रहेगी। नेता चुनाव जीतते हरते रहेंगे। लेकिन उनकी वर्दी पर लगे दाग शायद ही धुल पाएंगे। किसी निर्दोष की पीड़ा से बड़ी कोई पाप नहीं होती।Watch Video Revealed How Nalanda Police is trapping the innocent by saving the guilty

      दरअसल सिलाव-मेयार पथ पर हलीमचक जैठा मोड़ के पास अज्ञात अपराधियों ने करीब शाम 5 बजे जदयू के पंचायत अध्यक्ष चंदौरा निवासी 40 वर्षीय शैलेन्द्र कुमार उर्फ मानो की गोली मारकर हत्या कर दी।

      इस हत्याकांड को लेकर समूचे क्षेत्र में जिन लोगों के शामिल होने की क्षेत्र में चर्चा होने चर्चाएं उभरकर सामने आई, उससे इतर पुलिस ने कार्रवाई करनी शुरु कर दी। मुखिया रेखा देवी, उनके पति गुड्डु कुमार, भाई उमाशंकर समेत 18 वर्षीय पुत्र धनराज पटेल आदि को नामजद अभियुक्त बना दिया गया। पुलिस ने जहाँ 48 घंटे बाद प्राथमिकी दर्ज की, वहीं उसमें दर्ज वयान में भी काफी विरोधाभास देखी गई।

      आरोप है कि गंभीर मामलों के उद्भेदन में अजीबोगरीब कहानियां गढ़ने में माहिर नालंदा पुलिस के अफसरों ने सत्तारुढ़ नालंदा विधायक एवं मंत्री सरवन कुमार के ईशारे पर सबकुछ प्लांट किया और कार्रवाई करने में जुट गई।

      एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क के पास उपलब्ध प्रमाण और पड़ताल से साफ स्पषट होता है कि जिस समय शैलेन्द्र कुमार उर्फ मानो की गोली मारकर हत्या हुई, उस समय कोई भी आरोपी घटनास्थल पर नहीं थे।

      पुलिस ने जिन आरोपियों की गिरफ्तारी जिस स्थान से बताई, वे भी झूठ हैं। इसकी पुष्टि सीसीटीवी से साफ स्पष्ट होती है। मुखिया पुत्र की गिरफ्तारी भरावपर से की गई, लेकिन गिरफ्तारी स्थान बाजार समिति बताई गई। दो आरोपी की गिरफ्तारी गाँव से की गई, लेकिन गिरफ्तारी स्थान बिहार शरीफ दर्शाया गया।

      एक आरोपी उमाशंकर को घटना के दिन ही प्राथमिकी दर्ज होने के पहले ही गिरफ्तार कर लिया, लेकिन 4 दिन तक हिरासत में रखा। इस दौरान न तो उन्हें हिरासत में रखे जाने की सूचना उनके परिजनों को दी और न ही 4 दिनों तक न्यायालय में ही प्रस्तुत किया।

      आश्चर्य की बात तो यह है कि इस दौरान उमाशंकर की गिरफ्तारी से सिलाव थानाध्यक्ष इंकार करते रहे, वहीं इस बात की भी पुष्टि होती रही कि उमाशंकर लहेरी थाना में 4 दिनों पुलिस हिरासत में रखा गया।

      इस मामले में पुलिस ने कोई वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं की। हत्या के समय कोई भी आरोपी वारदात स्थल पर नहीं थे। मुखिया रेखा देवी उनके पुत्र बिहार शऱीफ स्थित अपने आवास पर थी। मुखिया एवं उनके पुत्र घर से कितनी बार कब बाहर निकले और आए, सबकुछ सीसीटीवी कैमरे में दर्ज है।

      मुखिया के पति रंजीत कुमार उर्फ गुड्डू मुखिया भी वारदात के समय राजधानी पटना में हरनौत विधायक हरिणारायण सिंह की पोती की शादी में शामिल थे। उसके भी वीडियो-फोटो भी उपलब्ध हैं।

      यही नहीं, मुखिया रेखा देवी ने वारदात की सूचना मिलते ही डीएसपी और एसपी से बातचीत की थी। इस बातचीत के मोबाईल लोकेशन से भी इसकी पुष्टि हो सकती है कि उस समय बनाए गए, आरोपी लोग कहां थे।

      जाहिर है कि किसी को न बचाने और न फंसाने की भ्रम उत्पन्न कार्य करने वाले सीएम नीतीश कुमार की पुलिस कार्रवाई के नाम पर सिर्फ स्वांग रचती है। अपने छद्म राजनीतिक आकाओं के ईशारे पर अधिक कार्य करती है।

      मामले से जुड़े गंभीर तथ्यः

      रेखा देवी 06:03:12 PM से अपने दोनो बच्चों के साथ मार्केट जाते हुए देखी जा रही है।

      19/11/21 को 05:09:41 PM पर हाथ में केन ले कर धनराज पटेल अपने घर में प्रवेश करते दिख रहा है।

      21/11/21 के 07:07:18 PM  पर पुलिस की एक बोलेरो और एक जिप्सी आती है रेखा देवी के आवाश पे तथा 07:07:48 PM  पर उनके घर में पुलिस प्रवेश करती है।

      07:38:30PM  पर एक थाना बाहर आ जाती है, थाना वापस चली जाती है।

      21/11/21 के 08:10:31 PM पर अपने साथ धनराज पटेल को ले कर जाती दिख रही है। और पुलिस डायरी में लिखती है कि 22/11/21 को भराव पर से धनराज पटेल को उठाए है। जोकि सफ़ेद झूठ है।

      मुखिया के साले उमाशंकर को ग्राम बसुअन से 19 के 3 बजे भोर में गिरफ्तार करती हैं और उसको दिखाती है कि बिहार शरीफ बाजार समिति 22 को  गिरफ्तार किए गए है।

      दो आरोपी को गांव से गिरफ्तार किया और दिखाया कि बिहार शरीफ से गिरफ्तार किए हैं। अगर सीडीआर निकाला जाए तो सब पता चल जाएगा।

      नीचे देखिए वे सारे सीसीटीवी वीडियो फुटेज, जो पुलिस की छद्म कार्रवाई की दास्तां बयां करने के लिए काफी है…..

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